जागरण संवाददाता, कानपुर : प्रसिद्ध फिल्म अदाकारा सोहा अली खान मानती हैं कि जब आपके आसपास बड़ी-बड़ी शख्सियतें हों तो आपके खुद के दब जाने का डर रहता है। पटौदी खानदान भी मल्टी स्टारर है, लेकिन उन्हें लगता है कि परिवार में उनकी भूमिका बहुत खास है। वह रिश्तों को बैलेंस करने में माहिर 'डिप्लोमेट' हैं।

सोहा अली खान शनिवार को अपनी मां जानी-मानी अभिनेत्री शर्मिला टैगोर की जन्मभूमि कानपुर में थीं। मैनावती मार्ग स्थित जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल में उन्होंने खुद की लिखी किताब 'मॉडरेटली फेमस' का विमोचन किया। स्कूली बच्चों से मुखातिब सोहा ने अपने परिवार पर लिखी किताब के बारे में बताया कि हर किसी की अपनी कहानी होती है, लेकिन महत्वपूर्ण है उसे लिखना। जब आप क्रिकेटर नवाब मंसूर अली पटौदी, फिल्म स्टार शर्मिला टैगोर, सैफ अली खान और करीना कपूर जैसी शख्सियतों के बीच में हों तो खुद को दबा महसूस कर सकते हैं। आपकी खुद की पहचान संकट में आ जाती है, मगर, मैं मानती हूं कि हर कोई क्लास में फ‌र्स्ट नहीं आता। मैंने परिवार के हर सदस्य को शामिल करते हुए, उनकी खासियत बताते हुए यह किताब लिखी है।

अच्छी फिल्म का करती हूं इंतजार

पत्रकारों से बातचीत में सोहा अली खान ने कहा कि 14 साल से फिल्म इंडस्ट्री में हूं। अच्छी फिल्म का इंतजार करती हूं। वैसे भी फिल्म मेरी जिंदगी नहीं है। उसके अलावा बहुत कुछ खास करने को मेरी जिंदगी में है।

परिवार में भी सभी का अलग रोल

इतने बड़े खानदान में अपने आपको कहां पाती हैं? इस सवाल पर वह बोलीं कि फिल्म की तरह परिवार में भी सभी का अलग रोल होता है। जब पारिवारिक सदस्य एक-दूसरे को नहीं समझ पा रहे होते हैं, तब मैं बड़ी भूमिका निभाती हूं। किताब लिखने का ख्याल कैसे आया? यह पूछने पर बोलीं कि लिखने के लिए अनुशासन चाहिए, जो मेरे अंदर है। जब आप कुछ लिखते हैं तो अपनी भावनाएं उड़ेल देते हैं और सुकून महसूस करते हैं।

किताब में खेमू का भी जिक्र

उन्होंने बताया कि किताब में एक चैप्टर पति कुणाल खेमू पर भी है कि कैसे उन्होंने मुझे इम्प्रेस किया। हां, पापा के बारे में लिखने में बहुत सावधानी बरतनी पड़ी। इससे पहले स्कूल के चेयरमैन चंदन अग्रवाल, डायरेक्टर ज्योति अग्रवाल और प्रधानाचार्य अंजू धवन ने सोहा अली खान का स्वागत किया।

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