जागरण संवाददाता, कानपुर : गंगा स्वच्छता के अभियान ने जबसे जोर पकड़ा है, तबसे जिम्मेदार अधिकारी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के संचालन के प्रति भी गंभीर हैं। मगर, शायद निगरानी आंखें मूंदकर की जा रही है। वाजिदपुर एसटीपी पर पिछले छह माह से होल्डर और बर्नर खराब हैं। स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मीथेन गैस हवा में घुल रही है।

सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में शोधन के लिए आने वाला सीवेज दूसरे चरण में स्लज बनता है। इसमें से हानिकारक मीथेन गैस निकलती है। इस गैस का दुष्प्रभाव रोकने के लिए प्लांट में ही गैस बर्नर व होल्डर लगाया जाता है। होल्डर में गैस जमा होती है और बर्नर में जाने के बाद जलकर नष्ट हो जाती है। इससे कर्मचारियों के साथ ही पर्यावरण को गैस नुकसान नहीं पहुंचाती। मगर, वाजिदपुर एसटीपी का गैस होल्डर व बर्नर छह माह से खराब है। यह हाल तब है जबकि एक साल पहले लाखों रुपये खर्च कर इसकी मरम्मत कराई गई थी। अब मीथेन सीधे हवा में घुल रही है। इससे पर्यावरण को तो नुकसान हो ही रहा है, साथ ही यहां काम कर रहे कर्मचारियों के लिए स्थिति ज्यादा चिंताजनक है।

प्लांट के परियोजना प्रबंधक पंकज यादव ने बताया कि उच्चाधिकारियों को जानकारी दी गई है। बजट आने पर मरम्मत करा समस्या दूर कराई जाएगी।

बीमार हो रहे एसटीपी के कर्मचारी : मीथेन गैस आंखों व फेफड़ों को नुकसान पहुंचाती है। एसटीपी के ज्यादातर कर्मचारियों की आंखें लाल हो गई हैं। उन्हें हल्के बुखार व सुस्ती की शिकायत भी है। 'मीथेन इरिटेटिंग गैस है। यह ज्यादा मात्रा में फैलेगी तो इसके संपर्क में आने वालों को नुकसान होगा। जो लोग पहले से फेफड़ों से संबंधित किसी भी प्रकार की बीमारी से ग्रसित हैं या नशा करते हैं, उनके लिए यह ज्यादा खतरनाक है। उनकी बीमारी तेजी से बढ़ेगी। स्वस्थ इंसान भी ज्यादा समय तक इसके संपर्क में रहे तो उसके फेफड़ों की कार्यक्षमता उम्र की तुलना में ज्यादा तेजी से कम होगी।'

-प्रो. सुधीर कुमार चौधरी, मुरारीलाल चेस्ट हॉस्टिल

Posted By: Jagran

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