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H1N1 ALert: कानपुर में होगी स्वाइन फ्लू की आरटी-पीसीआर जांच, लागू होगा कोविड प्रोटोकाल

Published: Sun, 30 Aug 2026 03:41 PM (IST)

कानपुर में स्वाइन फ्लू (H1N1) के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में अब लक्षण युक्त मरीजों की ...और पढ़ें

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HighLights

  1. एचवनएनवन की जांच के लिए लखनऊ नहीं भेजने पड़ेंगे सैंपल, 20 बेड के आइसोलेशन में छह बेड पर वेंटिलेटर

  2. मास्क लगाकर ही अस्पतालों में मरीजों को मिलेगा प्रवेश, स्वास्थ्य कर्मी व गंभीर मरीजों को लगाई जाएगी वैक्सीन

जागरण संवाददाता, कानपुर। स्वाइन फ्लू इन्फ्लूएंजा ए (एचवन एनवन) वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए जीएसवीएम मेडिकल कालेज में किट से लक्षण युक्त मरीजों की आरटी-पीसीआर जांच की जाएगी। कोविड प्रोटोकाल की तरह ही अस्पताल, मास्क लगाकर ही मरीजों को अस्पताल में प्रवेश दिया जाएगा।

चिकित्सालय में संचालित फीवर ओपीडी और आइसोलेशन वार्ड में डाक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या बढ़ा दी गई है। फीवर ओपीडी में पहुंच रहे 20 से 25 मरीजों में गंभीर लक्षण वालों को आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट किया जाएगा। वहीं, चेस्ट रोग में गंभीर मरीजों का वैक्सीनेशन किया जाएगा।

एलएलआर अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक प्रो. सौरभ अग्रवाल ने बताया कि उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की समीक्षा बैठक में स्वाइन फ्लू के खतरे से निपटने को तैयार रहने के निर्देश मिले हैं। चिकित्सालय में पहले से संचालित फीवर ओपीडी में डाक्टरों की संख्या, दवा व वैक्सीनेशन की तैयारी पूरी हो गई है।

सोमवार से ही आइसोलेशन वार्ड में गंभीर मरीजों को भर्ती कर उपचारित किया जाएगा। चेस्ट चिकित्सालय व फीवर ओपीडी में पहुंचने वाले गंभीर सांस के रोगियों की आरटीपीसीआर जांच अब जीएसवीएम मेडिकल कालेज में ही होगी। अभी तक लखनऊ जांच के लिए सैंपल भेजने पड़ते थे।

अस्पताल में लंबी छुट्टी पर गए डाक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों को उप मुख्यमंत्री के निर्देश की जानकारी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि आइसोलेशन वार्ड में बेड की संख्या 30 करने की तैयारी है। गंभीर मरीजों के लिए छह बेड वेंटिलेटर के सुरक्षित किए गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग के संक्रामक रोग के नोडल डा. राजेश्वर सिंह ने बताया कि सभी अस्पताल व जांच लैब को लक्षण युक्त मरीजों की जांच प्राथमिकता पर करने के लिए निर्देशित किया गया है। पब्लिक एडवाइजरी जारी कर दी गई है। स्वास्थ्य कर्मियों का वैक्सीनेशन सोमवार से शुरू हो जाएगा।

ऐसे फैलता संक्रमण

स्वाइन फ्लू (एचवन एनवन) संक्रामक श्वसन रोग है, जो नाक, गले व फेफड़ों को संक्रमित करता है। स्वस्थ व्यक्ति में इसका असर हल्का होता है, जबकि कमजोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता वाले बुजुर्ग, बच्चें, गर्भवती महिलाओं तथा मधुमेह, हृदय, फेफड़े या अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों में इसका जोखिम अधिक रहता है। इसका संक्रमण संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने, बोलने व सांस लेने के दौरान निकलने वाली श्वसन बूंदों एवं सूक्ष्म कणों के माध्यम से होता है। संक्रमित व्यक्ति के निकट रहने, बंद एवं भीड़-भाड़ वाले स्थानों में लंबे समय तक संपर्क तथा दूषित हाथों से आंख, नाक, व मुंह छूने से भी संक्रमण फैल सकता है।

शुरुआती लक्षण

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की पूर्व अध्यक्ष डा. नंदिनी रस्तोगी ने बताया कि इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे होते हैं। वायरस के संपर्क में आने के लगभग तीन से पांच दिनों के भीतर एचवन एनवन के लक्षण दिखते हैं। अधिक थकान, बुखार, मांसपेशियों में दर्द, ठंड लगना, सिरदर्द, गले में खरास, खांसी के साथ दिखते हैं। जिसका सबसे ज्यादा खतरा पांच वर्ष से छोटे बच्चे, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले, डायबिटीक, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग में बना रहता है।

ऐसे करें बचाव

माइक्रोबायोलाजिस्ट डा. विकास मिश्रा ने बताया कि भीड़भाड़ वाले स्थान में जाने बचना चाहिए। खांसते-छींकते समय मुंह और नाक को रुमाल से ढक लेना चाहिए। इसकी जांच के लिए रैपिड इंफ्लूएंजा डायग्नोस्टिक टेस्ट, वायरल कल्चर की जांच से स्वाइन फ्लू की जांच की जाती है। बचाव के लिए पर्याप्त आराम, शरीर में पर्याप्त तरल की मात्रा, बुखार में डाक्टर की सलाह पर दवा व गंभीर लक्षण दिखने पर अस्पताल में भर्ती होना चाहिए।


खान-पान में इन्हें शामिल करें

  • खाने में प्रोबायोटिक दही लें।
  • मौसमी फल व सब्जियों लें।
  • सूप व तरल पदार्थ अधिक लें।
  • हल्का और सुपाच्य भोजन करें।
  • विटामिन सी यानी खट्टे फल व नींबू का सेवन करें।