कानपुर , जेएनएन। अधिकारी आंख मूंदे रहे और प्रभावशाली लोगों ने दहेली सुजानपुर में केडीए की करोड़ों रुपये की जमीन पर गेस्ट हाउस और मार्केट तक बना डाली। अभी भी बिना लेआउट के प्लाटिंग और अवैध निर्माण किया जा रहा है। दहेली सुजानपुर में केडीए की सात सौ करोड़ की जमीन का मामला सामने आने पर तीन दिन पहले मुकदमा और नोटिस देकर अफसर शांत बैठ गए है। कब्जेदारों पर इसका असर नहीं पड़ा है स्थिति यह है कि और तेजी से निर्माण हो रहा है।

दहेली सुजानपुर में केडीए और राजस्व विभाग की करोड़ों की जमीन है लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा रखरखाव न करने और जमीन का प्रयोग न करने के चलते लोग कब्जा कर रहे है। केडीए में जमीन पर नजर रखने को तहसील विभाग, अभियंत्रण विभाग और प्रवर्तन दस्ता है। इसके बाद भी सरकारी जमीन पर कब्जे हो रहे है। क्षेत्र में 47 आराजी संख्या है इसमें कई बीघा जमीन है।

इसमें केडीए और राजस्व विभाग की भी जमीन है। यहां पर केडीए स्वर्ण जयंती विहार, अलकनंदा, हाईवे सिटी और हाईवे सिटी विस्तार योजना लाया है। इसके आसपास केडीए की कई बीघा जमीन है। भूमाफिया ने केडीए की जमीन के बगल में स्थित जमीन की रजिस्ट्री करके प्राधिकरण की जमीन पर कब्जा दे दिया। ऐसा ही एक मामला पकड़ में आया।

भूमाफिया ने केडीए की जमीन बेच डाली। यहां पर विश्वकर्मा कोऑपरेटिव सोसाइटी बस गयी है। पक्के निर्माण हो गए है। अब केडीए 108 लोगों को नोटिस दे रहा है। वर्ष 2018 में केडीए ने यहां पर अवैध निर्माण गिराए थे और पूर्व उपाध्यक्ष ने मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे लेकिन मामला दबा दिया गया।

उपाध्यक्ष राकेश सिंह ने जांच के आदेश दिए है। किसने आदेश के बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं कराया। साथ ही जमीन खाली कराने को कहा है। हालत यह है कि एक गेस्ट हाउस बन रहा है। एक स्कूल के पास धड़ल्ले से निर्माण चल रहा है।  

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