कानपुर, जेएनएन। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के एलएलआर अस्पताल (हैलट) में पांच साल पहले वर्ष 2016 में इलाज के अभाव में 12 वर्षीय अंश ने दम तोड़ दिया था। डाक्टर इलाज मुहैया कराने के बजाय उसके पिता नारायण पुरवा निवासी सुनील को इमरजेंसी और बाल रोग विभाग के बीच चक्कर लगवाते रहे। स्ट्रेचर नहीं मिलने पर पिता बच्चे को कंधे पर उठाए दौड़ता रहा और मासूम की सांसें थम गईं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाया था। कार्रवाई से अवगत नहीं कराने पर मेडिकल कालेज प्रशासन पर तीन लाख रुपये जुर्माना लगाया। मंगलवार कालेज प्रशासन ने अंश के पिता को तीन लाख रुपये भुगतान कर दिया। हालांकि प्रकरण में अभी तक दोषी से वसूली नहीं हो सकी है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने शासन को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इस पर विशेष सचिव शुभ्रा सक्सेना ने मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला को अविलंब भुगतान करने का निर्देश दिया था। इस प्रकरण में दोषी स्वास्थ्य विभाग के इमरजेंसी मेडिकल आफीसर डा. मयंक को मना गया। हालांकि शासन से दबाव बढऩे पर मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला एवं प्रमुख अधीक्षक प्रो. आरके मौर्या ने अन्य व्यय के बजट से अंश के पिता सुनील को तीन लाख रुपये का चेक प्रदान कर दिया। इससे शासन को भी अवगत करा दिया। प्रमुख अधीक्षक ने बताया कि डा. मयंक स्वास्थ्य विभाग के हैं, उनके विभाग को मुआवजे की वसूली की कार्रवाई के लिए कहा गया है।

Edited By: Abhishek Agnihotri