जागरण संवाददाता, कानपुर : बीते दो दशक में सरकारी तंत्र ने शहर में वृहद स्तर पर पौधरोपण किया। विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी हरियाली का दावा किया लेकिन शहर में कुछ स्थानों को छोड़कर कहीं भी ऐसा महसूस होता है क्या? दरअसल कागजों में आंकड़ेबाजी कर जंगल खड़े कर दिए गए जो आवासीय व अन्य प्रोजेक्ट के कंक्रीट के जंगल में गुम होते चले गए। अब प्रदूषण जब जान का दुश्मन बना है तो सबको लग रहा है कि काश पेड़ बचे होते तो प्रदूषण सोखकर जिंदगी बढ़ा देते।

शहर में करीब 20 वर्षो में वन, केडीए, शिक्षा समेत सभी विभाग मिलकर एक करोड़ से अधिक पौधे लगा चुके हैं, लेकिन यह आंकड़े सिर्फ कागजों में हैं। हर वर्ष लाखों पौधे रोपे जाते हैं। पौधे रोपने और उन्हें बचाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही है। तमाम कवायद और कोशिश के बाद भी जिले में वनीकरण की स्थिति बेहद खराब है। यहां वन क्षेत्र महज 1.76 फीसद ही है जबकि 33 फीसद होना चाहिए। वन का क्षेत्रफल कम होने की वजह से ही आज प्रदूषण का स्तर बढ़ा है और लोगों को जहरीली गैसों की वजह से बीमारियों का दंश झेलना पड़ रहा है। वन क्षेत्र कम होने के लिए शासन और प्रशासन तो जिम्मेदार है ही यहां के लोग भी कम जिम्मेदार नहीं हैं।

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पौधों का रखरखाव न होना मुसीबत

पौधे रोपने के साथ ही उन्हें बचाना भी संबंधित विभागों की जिम्मेदारी होती है। समय पर पौधों को पानी और खाद मिले। उन्हें पशु अपना निवाला न बनाएं इसलिए ट्री गार्ड या ब्रिक गार्ड लगाए जाएं, लेकिन यह कार्य भी पर्याप्त मात्रा में नहीं हो पा रहा है। लगने वाले के बाद विभिन्न तरह के रोग की वजह से करीब 10 फीसद पौधे सूख जाते हैं जबकि इतने ही पौधे पशुओं का निवाला बनते हैं, गर्मी की वजह से सूख जाते हैं या लोग तोड़ देते हैं।

नहीं परखी जाती दावों की हकीकत

वन विभाग का दावा है कि वित्तीय 2015-16 से 2017-18 तक 2502.29 हेक्टेयर में 17,85,339 पौधे रोपे गए। दावा तो बड़ा है, लेकिन हकीकत परखी जाए तो फिर कागजों पर पौधरोपण की कहानी भी सामने आएगी। ये पौधे अकेले वन विभाग ने ही नहीं रोपे हैं बल्कि सभी विभागों के योगदान का दावा है। इसकी हकीकत आज तक नहीं परखी गई। वन विभाग हो या केडीए, नगर निगम, विकास विभाग, शिक्षा विभाग जो आंकड़े प्रस्तुत करते हैं सरकार उसे ही मान लेती है।

बिना रुपये के प्रदूषण से जंग

चालू वित्तीय वर्ष में 13.37 लाख पौधे रोपने का लक्ष्य है। सरकार ने वन विभाग को इन पौधों का रोपण जन सहयोग से कराने के लिए कहा है। एक व्यक्ति एक पौधा रोपने का लक्ष्य लेकर वन विभाग जनता के बीच जा रहा है। सवाल यह है कि अगर जन सहयोग नहीं मिला तो फिर इस लक्ष्य की पूर्ति कैसे होगी। वन विभाग की नर्सरी में 13.76 लाख पौधे हैं, लेकिन इनकी रखवाली के लिए बजट नहीं होगा तो फिर ये पौधे जीवित भी रहेंगे, यह कह पाना कठिन होगा।

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6,57,733 पौधे वित्तीय वर्ष 2015-16 में रोपे

95,849 पौधे वित्तीय वर्ष 2016-17 में रोपे

1,03757 पौधे वित्तीय वर्ष 2017-18 में रोपे गए

13.37 लाख पौधे चालू वित्तीय वर्ष में रोपने का लक्ष्य।

Posted By: Jagran

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