कानपुर, जेएनएन। विदेश में रहने वालों तक देश का साहित्य पहुंचाने के लिए 'गाथा' वेबसाइट व एप ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए उसमें बंगाली लेखकों की रचनाएं भी जोड़ी गई हैं। आइआइटी भौतिक विज्ञान के स्नातकोत्तर के पूर्व छात्र अमित तिवारी के इस एप पर बंगाली साहित्य के कंटेंट अपलोड करके इसकी शुरुआत बुधवार को 'गाथा' के वार्षिक समारोह के अवसर पर आयोजित आनलाइन कार्यक्रम में हुई। आइआइटी निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने हिंदी और क्षेत्रीय भाषा के साहित्य को विदेश में बैठे चाहने वालों तक पहुंचाने के लिए इस तकनीक को बेहतर बताया। इस दौरान प्रख्यात साहित्यकार गीत चतुर्वेदी ने गीत की बातें सत्र और सुविख्यात अभिनेत्री नयनी दीक्षित ने गीत व कविता सत्र में चर्चा की।

दस हजार रचनाओं की गाथा

दो साल में अमीर खुसरो, प्रेमचंद, मीराबाई, चंद बरदाई व रामधारी सिंह दिनकर जैसे साहित्यकारों व कथाकारों की 10 हजार रचनाओं को गाथा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों तक पहुंचाया है। डा. अमित के साथ इस सफर में अमेरिका में रहने वाली पीपीएन डिग्री कालेज की पूर्व छात्रा पूजा श्रीवास्तव व भावना तिवारी सहयोगी रहीं हैं। आइआइटी के पूर्व छात्र अमित की वेबसाइट (https//gaathaonair.com) व (https//play.google.com/store/apps/detailsid.com.gaathaonair.com) एप अब बंगाली साहित्य को भी दुनियाभर के चाहने वालों तक पहुंचाएगी। नोबल पुरस्कार विजेता व विश्वविख्यात कवि रबींद्रनाथ टैगोर व उपन्यासकार शरत चंद्र चटर्जी की रचनाओं के साथ बंगाली साहित्य अपलोड किए जाने की शुरुआत कर दी गई है।

आसान नहीं एक जगह इतना साहित्य मिलना

आइआइटी में इंक्यूबेट 'गाथा' स्टार्टअप के संस्थापक अमित ने बताया कि कई देशों में हिंदी साहित्यकारों, कथाकारों व कवियों की पुस्तकें मिलना आसान नहीं हैं, जबकि वहां इन्हें पढऩे वालों की संख्या काफी है। इसी बात को ध्यान में रखकर उन्हें वेबसाइट व एप का आइडिया आया। इसकी खासियत यह है कि इनके जरिए साहित्यकारों की रचनाएं सुनी भी जा सकतीं हैं।

दादा दादी की कहानी गाथा की जुबानी

गाथा जहां बड़ों के लिए साहित्य व उपन्यास की सौगात लेकर आया है, वहीं इसके जरिए बच्चे दादा-दादी व नाना-नानी की कहानियां भी सुन रहे हैं। समय के साथ धुंधली हो चुकीं यह कहानियां उन्हें नैतिक शिक्षा व संस्कार दे रहीं हैं। बच्चों के लिए इसमें सैकड़ों कहानियां अपलोड हैं।