Ganga Pollution: 'नमामि गंगे' के बीच गंगा मैली, 38 साल में 1621 करोड़ खर्च फिर भी मैली क्यों बह रही गंगा
Ganga Pollution: कानपुर में 38 साल में 1621 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद गंगा मैली है, जिसमें अभी भी ...और पढ़ें

परमट घाट स्थित नाले से गंगा नदी में जाता दूषित पानी l जागरण
HighLights
एसटीपी तक दूषित पानी जाने के बजाए गंगा में गिर रहा
सात नाले रोज 30 एमएलडी दूषित पानी गंगा में गिराते
839 करोड़ रुपये के और कार्य गंगा सफाई पर होंगे
जागरण संवाददाता, कानपुर। Ganga Pollution: गंगा को निर्मल अविरल करने में अब तक 1621 करोड़ रुपये खर्च हो चुके है, लेकिन अभी भी गंगा में सात नाले गिर रहे है। इससे रोज 30 एमएलडी लीटर दूषित पानी सीधे गंगा में गिरता है। हालांकि माघ मेला को देखते हुए नगर निगम द्वारा बायोरेमिडेशन के माध्यम से नालों के दूषित पानी को शोधित किया जा रहा है। कागज में ही साफ दिख रहे है मौक पर गंगा में गंदा पानी जा रहा है।
पिछले दिनों खुद नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने लापरवाही पकड़ी थी और मौके पर ही अफसरों को फटकार लगायी थी। इसके अलावा गंगा के किनारे बनी बस्तियों का भी सीवरयुक्त पानी सीधे जा रहा है। करीब 40 एमएलडी लीटर दूषित गंगा में मिल रहा है। अभी गंगा की सफाई के लिए 839 करोड़ के कार्य होने है। इसमें कुछ चल रहे है या कुछ कार्यों के टेंडर होने वाले है। बिना नियोजित प्लानिंग के कार्य कराया गया।
नारामऊ, नानकारी समेत आसपास में सीवर लाइन पहले डाल दी गयी। बाद में दूषित पानी शोधित करने के लिए बनियापुरवा में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी)बनाया। टेस्टिंग की गयी तो पाया कि सीवर लाइन नाले में बैठ गयी है। इस मामले में दो अफसरों पर कार्रवाई की गयी। अब फिर से सीवर लाइन डाली जा रही है। अभी सीवर लाइन डाल दी बाद में सात एसटीपी का निर्माण हो चुका है। इनकी कुल क्षमता 420 एमएलडी दूषित पानी ट्रीट करने की क्षमता है लेकिन अभी सिर्फ 320 एमएलडी हो पा रही है। इसमें दूषित पानी नहीं पहुंच रहा है। गंगा और पांडु नदी में कुल 10 करोड़ लीटर दूषित पानी गिर रहा है।
वहीं अभी भी 40 प्रतिशत इलाकों में सीवर लाइन नहीं पड़ी है। हालांकि अभी भी गंगा में अभी छह नाले गिर रहे है।इनको रोकने के लिए प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेजा गया है। रामेश्वर नाला, वाजिदपुर नाला, मैस्कर घाट, गोला घाट, डबका नाला, गुप्तार घाट व रानी घाट नाला सीधे गंगा में गिर रहा है। इसको नगर निगम द्वारा इन नालों को जैविक उपचार के माध्यम से ट्रीट करके दूषित पानी गंगा में डाला जाता है।
यह हुआ भ्रष्टाचार
जवाहर लाल नेहरू नेशनल अरबन रिन्युवल मिशन (जेएनएनयूआरएम) की सीवरेज योजना के तहत वर्ष 2008 में लखनपुर सीवेज पंपिंग स्टेशन से मैनावती मार्ग होते हुए सिंहपुर मार्ग से बनियापुरवा स्थित 15 एमएलडी एसटीपी तक 13 करोड़ रुपये से सीवर लाइन डाली गयी। ठेकेदार फर्म सतीश कुमार द्वारा सड़क पर पाइप न डालकर मैनावती मार्ग से सिंहपुर मार्ग तक नाले में डाली सीवर लाइन दब गयी। मिट्टी भर जाने के कारण बंद हो गयी। वर्ष 2019 में करीब 11 साल बाद 15 करोड़ रुपये एसटीपी बनियापुरवा का निर्माण हुआ। इसको चालू किया गया तो पानी प्लांट तक नहीं पहुंचा।तब पता चला कि सीवर लाइन जमीन में दफन हो गयी है। अब 32 करोड़ रुपये से नई सीव लाइन डालने के साथ ही सीवरेज पंपिंग स्टेशन का भी निर्माण कराया जा रहा है। इसको लेकर नौ किलोमीटर लंबी सीवर लाइन वर्ष 2008 में तैनात रहे जल निगम के अधिशासी अभियंता मुकेश कुमार और अवर अभियंता एके वार्ष्णेय थे। इवर्ष 2021 में शासन ने जल निगम मुख्यालय स्तर पर जांच कमेटी गठित की। इसमें ठेकेदार और अभियंताओं पर कार्रवाई की गयी।
इन प्रोजेक्ट से खर्च हुआ धन
| योजना / प्रोजेक्ट | खर्च राशि (₹ करोड़) | कार्य विवरण |
|---|---|---|
| इंडो-डच प्रोजेक्ट | 166 | 130 MLD, 5 MLD और 36 MLD क्षमता के ECTP का निर्माण |
| जेएनएनयूआरएम योजना | 746 | सीवर लाइन, पंपिंग स्टेशन और एसटीपी निर्माण • 210 MLD एसटीपी बिनगवां – ₹141 करोड़ • 42 MLD एसटीपी जाजमऊ – ₹40 करोड़ • 42 MLD एसटीपी सजारी – ₹35 करोड़ |
| नमामि गंगे योजना | 370 | 34 वार्डों की सफाई, 100 किमी सीवर लाइन • 30 MLD एसटीपी पनकी • ₹63 करोड़ से 5 नाले बंद |
| अमृत योजना | 276 | 12 वार्डों में नई सीवर लाइन (सीधे एसटीपी से जोड़ी जाएगी) |
| दक्षिण क्षेत्र सीवर परियोजना | 425 | 12 वार्डों में सीवर लाइन, दूषित जल बिनगवां एसटीपी भेजा जाएगा |
| नाला टैपिंग परियोजना | 138 | गंगा व पांडु नदी में गिर रहे 14 नालों को बंद करने हेतु टेंडर प्रक्रिया पूर्ण |
प्लांट की स्थिति
| प्लांट का नाम | प्लांट क्षमता (एमएलडी) | ट्रीट हो रहा (एमएलडी) |
|---|---|---|
| वाजिदपुर | 130 | 100 |
| वाजिदपुर | 27 | 20 |
| वाजिदपुर (नया) | 42 | 30 |
| बिनगवां | 210 | 140 |
| बनियापुरवा | 15 | 0 |
| सजारी | 42 | 22 |
| पनका | 30 | 8 |
वर्तमान समय में 420 एमएलडी सीवर का पानी निकलता है शोधित हो रहा 320 एमएलडी
टेनरी के दूषित पानी को शोधित करने के लिए अलग से 20 एमएलडी का इंफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) का निर्माण जाजमऊ में कराया गया है यह चालू भी कर दिया गया है। अभी जाजमऊ में बने 36 एमएलडी कामन इंफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट में 27 एमएलडी घरेलू दूषित पानी और टेनरी का नौ एमएलडी दूषित पानी शोधित किया जा रहा था जबकि टेनरी का दूषित पानी ज्यादा निकलता है। यह पानी सीधे गंगा में डाल दिया जाता था। अब पूरा टेनरी का दूषित पानी शोधित होकर गंगा में जा रहा है। वहीं पांच एमएलडी का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बंद हो गया है।
जिम्मेदार बोेले
गंगा में गिर रहे सात नालों को जैविक उपचार से शोधित किया जा रहा है। मानक के अनुरूप जैविक उपचार करने के आदेश दिए है। पिछले दिनों निरीक्षण करके मौके पर अफसरों को आदेश दिए। लापरवाही बरतने में कार्रवाई की जाएगी।
अर्पित उपाध्याय नगर आयुक्त
