Free Scooty Scheme: पहले आवेदन फिर शपथ पत्र, जानें कैसे मिलेगा रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना का लाभ
रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत कानपुर में छात्राओं को वेरिफिकेशन के दौरान अतिरिक्त शपथ पत्र की मांग से परेशानी ...और पढ़ें

HighLights
रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना में छात्राओं को परेशानी
कानपुर विश्वविद्यालय में वेरिफिकेशन के लिए अतिरिक्त शपथ पत्र मांगा
पहले ही दो बार शपथ पत्र देने के बाद भी दोबारा मांग
जागरण संवाददाता, कानपुर। रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना का लाभ पाने की उम्मीद में वेरिफिकेशन कराने पहुंच रहीं छात्राओं को विश्वविद्यालय की अतिरिक्त कागजी प्रक्रिया परेशान कर रही है। आवेदन से लेकर कालेज स्तर पर दस्तावेज सत्यापन तक शपथ पत्र देने के बाद अब छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के वेरिफिकेशन सेंटर पर छात्राओं से अलग से शपथ पत्र लिया जा रहा है। इससे छात्राओं को दस्तावेज जमा करने के बाद भी वेरिफिकेशन पूरा कराने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
स्नातक पास छात्राओं के लिए प्रदेश सरकार की ओर से शुरू की गई योजना के तहत छात्राओं ने कालेज स्तर पर आवेदन किया था। आवेदन के दौरान आय, निवास समेत अन्य जानकारियों के लिए आवश्यक शपथ पत्र भी दिए गए। इसके बाद कालेज स्तर से दस्तावेजों को अप्रूव करते समय भी शपथ पत्र की प्रक्रिया पूरी की गई। अब विश्वविद्यालय में वेरिफिकेशन के लिए पहुंचने पर एक और शपथ पत्र मांगा जा रहा है।
दस्तावेज जमा, फिर भी नहीं पूरा हो रहा काम
वेरिफिकेशन सेंटर पर छात्राएं अपने सभी जरूरी दस्तावेज लेकर पहुंच रही हैं। दस्तावेज जमा करने के बाद उन्हें बताया जा रहा है कि अलग से शपथ पत्र भी देना होगा। शपथ पत्र में छात्राओं को यह घोषित करना है कि आवेदन में उनके द्वारा दी गई सभी सूचनाएं सही हैं। भविष्य में कोई जानकारी गलत मिलने पर इसकी जिम्मेदारी स्वयं छात्रा की होगी। इसके बाद ही वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
जानें क्या कहना है विश्वविद्यालय प्रशासन का
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि शासन स्तर पर हुई बैठक में छात्राओं से अलग शपथ पत्र लेने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य गलत सूचना दिए जाने की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना है। हालांकि छात्राओं का सवाल है कि जब आवेदन और कालेज स्तर पर पहले ही शपथ पत्र लिए जा चुके हैं तो विश्वविद्यालय में दोबारा वही प्रक्रिया क्यों कराई जा रही है। छात्राओं का कहना है कि पहले से स्पष्ट जानकारी और व्यवस्था होती तो वेरिफिकेशन सेंटर पर उन्हें अतिरिक्त परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
