कानपुर, [विक्सन सिक्रोड़िया]। कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए बनाए गए आरोग्य सेतु एप का सेल्फ स्क्रीनिंग टेस्ट आइआइटी कानपुर के पूर्व छात्रों की देन है। यही टेस्ट लक्षण के आधार पर किसी व्यक्ति को स्वस्थ व अस्वस्थ बताने के साथ आसपास संक्रमण के बारे में आगाह करता है। पूर्व छात्रों ने एप का चैट बॉट डिजाइन किया है। एप बनाने वाली टीम में 20 वैज्ञानिक, टेक्नोक्रेट व डॉक्टर शामिल हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर आधारित है एप

आरोग्य सेतु एप आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के तहत काम करता है। व्यक्ति से उसके स्वास्थ्य संबंधित पूछे गए प्रश्नों के आधार पर डेटा तैयार कर यह सरकार तक पहुंचा रहा है। इस एप को बनाने के लिए टीम ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल कर पहले प्रोटोटाइप बनाया। डिजाइन के सफल परीक्षण के बाद यह चैट बॉट बनाया गया।

आठ करोड़ लोगों तक पहुंच चुका है एप

वर्ष 2001 में आइआइटी कानपुर से पर्यावरण इंजीनियरिंग एवं प्रबंधन से एमटेक करने वाले पूर्व छात्र उमाकात सोनी ने बताया कि आरोग्य एप अब तक आठ करोड़ लोगों तक पहुंच चुका है। डेटा के आधार पर यह देखा जा रहा है कि कोरोना वायरस का दुष्प्रभाव किस अंग पर सबसे ज्यादा पड़ रहा है, जिसके आधार पर एंटी वायरल ड्रग की खोज की जा रही है।

सटीक दवाएं दिए जाने की तैयारी

उमाकात सोनी ने बताया कि आíटफिशियल इंटेलीजेंस की सहायता से डेटा का विश्लेषण करके दवाओं का टेस्ट किया जा रहा है। यह पता लगाया जा सकेगा कि एक साथ कौन-कौन सी दवाएं दी जा सकती हैं और कौन सी नहीं। इसके अलावा यदि मरीज पहले ही किसी रोग से संक्रमित है तो यह भी देखा जाएगा कि कौन सी दवा इस वायरस से लड़ने में कारगर है।

डिजाइन तैयार करने वाले पूर्व छात्र

  • प्रो. पुलकित अग्रवाल : एमआइटी यूएसए में प्रोफेसर व आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस विशेषज्ञ
  • अरविंद सराफ : कंप्यूटर विशेषज्ञ, को-फाउंडर रतन टाटा बेक्ड हेल्थकेयर सोशल टेक वेंचर, एआइ फाउंड्री
  • सुभाशीष बनर्जी : एआइफाउंड्री के को-फाउंडर व इंवेस्टमेंट बैंकर
  • उमाकात सोनी : एआइ फाउंड्री के को-फाउंडर व आíटफिशियल इंटेलीजेंस विशेषज्ञ

इंडियन टी20 लीग

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस