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कानपुर चिड़ियाघर में फिर मर गई सैकड़ों मछलियां, न कोई जांच न इंतजाम, 18 दिन में दूसरी बार हुई ये घटना

Published: Wed, 12 Aug 2026 05:57 PM (GMT+05:30)

कानपुर चिड़ियाघर में 18 दिनों के भीतर दूसरी बार सैकड़ों मछलियों की मौत हो गई है। प्रशासन ने अब तक कोई जांच या कार्रवाई नहीं की, जिससे लापरवाही उजागर हुई।

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HighLights

  1. कानपुर चिड़ियाघर में 18 दिन में दूसरी बार मछलियां मरीं।

  2. प्रशासन ने अब तक कोई जांच या कार्रवाई नहीं की।

  3. झील में गंदे पानी और घास को मौत का कारण माना।

जागरण संवाददाता, कानपुर। कानपुर चिड़ियाघर में 18 दिन में दूसरी बार सैकड़ों मछलियों की मौत हो गई। दूसरी बार मछलियों की मौत के बावजूद चिड़ियाघर प्रशासन ने न तो अब तक कोई जांच की न किसी पर कार्रवाई। नगर निगम को पत्र भी लिखा लेकिन वहां से भी कोई जांच के लिए नहीं आया।

चिड़ियाघर की झील में मछलियों के मरने का सिलसिला जारी है। यहां दूसरी बार सैकड़ों की संख्या में मछलियां मरी मिली है। उनको झील से निकलवा कर दफना दिया गया। झील के पानी को साफ करने के लिए टाक्सिन रोकने वाला केमिकल टाक्सीमा व आक्सीजन का स्तर बढ़ाने वाली ओटू मैक्स टेबलेट डाली गई है।

झील के पानी में घास उगी हुई है, इसकी वजह से झील पट गई है। इसकी सफाई नहीं हो पाई है। जुलाई में मछलियों के मरने पर चिड़ियाघर प्रशासन ने विकास नगर से आने वाले नाले का गंदा पानी ओवर फ्लो होने की बात कही थी। इसके लिए नगर निगम को पत्र भी लिखा था।

चिड़ियाघर में अब तक कोई टीम पानी की जांच व निरीक्षण करने नहीं आई है। यही स्थिति रही तो मछलियों के मरने का क्रम जारी रह सकता है। चिड़ियाघर में प्राकृतिक झील है। इसमें मछलियों के साथ ही मगरमच्छ, कछुए व अन्य जलजीव भी हैं।

झील में मंगलवार को मछलियां उतराती मिली तो कर्मचारियों ने इसकी जानकारी अधिकारियों को दी। मौके पर पहुंच कर नाव से मरी हुई मछलियों निकाला गया। पानी में आक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए दवा भी डाली गई। मछलियां क्यों मर रही है, इसका कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है।

चिड़ियाघर प्रशासन का कहना है कि विकास नगर नाले का पानी ओवर फ्लो होकर झील में मिलता है, जिसकी वजह से यहां का पानी प्रदूषित हो रहा है। वहीं झील में मछलियों की संख्या भी काफी अधिक हो गई है।

पिछली महीने 24 जुलाई को मछलियां मरी थी। इसके बाद यहां घास को हटाने का कार्य शुरू कराया गया था लेकिन इसे बंद कर दिया गया। झील का अधिकांश हिस्सा घास से पटा हुआ हैा। चिड़ियाघर के क्षेत्रीय वन अधिकारी फिरोज खान ने बताया कि नगर निगम को पत्र लिखा गया था लेकिन अब तक कोई अधिकारी जांच के लिए नहीं आया है। झील के पानी की जांच कराई जाएगी।