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कहीं आपकी डिग्री-मार्कशीट फर्जी तो नहीं? 9 राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों से जुड़ा बड़ा डिग्री-मार्कशीट गिरोह बेनकाब

Published: Fri, 20 Feb 2026 08:01 PM (IST)

कानपुर में फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। यह गिरोह नौ राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों में सक्रिय था, जिसने सीटों से अधिक फर्जी डिग्रियां बेचीं।

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HighLights

  1. विश्वविद्यालय की सीटों से ज्यादा बांटी थी फर्जी डिग्रियां और मार्कशीट

  2. पुलिस आयुक्त ने प्रकरण की जांच के लिए शुक्रवार को गठित की एसआइटी

  3. गिरोह से एलएलबी की डिग्री लेकर वकालत करने वाले किए जा रहे चिह्नित

  4. सरगना समेत चार आरोपितों को भेजा जा चुके जेल, पांच अन्य की तलाश

जागरण संवाददाता, कानपुर। नौ राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों में गिरोह ने लिपिक की मिलीभगत से सीटों से ज्यादा लोगों को डिग्री और मार्कशीट बनाकर बेच दी। मामला कई राज्यों से जुड़ा होने के चलते अब इसकी जांच के लिए शुक्रवार को पुलिस आयुक्त ने एसआइटी गठित की है। वहीं, शहर में इस गिरोह से एलएलबी की डिग्री लेकर वकालत करने वालों को भी पुलिस चिह्नित कर रही है, जिसके बाद उन पर भी कार्रवाई हो सकती है।

किदवई नगर थाना पुलिस ने फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने वाले गिरोह के सरगना रायबरेली निवासी शैलेंद्र कुमार, साथी प्रयागराज के पूरामुफ्ती निवासी नागेन्द्र मणि त्रिपाठी, गाजियाबाद के इंदिरापुरम में रह रहे जोगेन्द्र और उन्नाव के शुक्लागंज इंदिरानगर निवासी अश्वनी निगम को गिरफ्तार किया था। शैलेंद्र वर्ष 2012 से साकेत नगर के जूही कलां स्थित कविशा अपार्टमेंट के फ्लैट में रहता है और यहां उसने शैल ग्रुप आफ एजुकेशन नाम से कार्यालय खोल रखा था।

कई शिकायतें आईं

यहां से वह साथियों के साथ मिलकर विद्यालय और विश्वविद्यालय में बिना प्रवेश और परीक्षा दिए डिग्री और मार्कशीट बनाने का काम करता था। उसके खिलाफ कई शिकायतें तो आईं, लेकिन साक्ष्य नहीं मिल रहे थे। शहर के एक इंस्पेक्टर ने खुद ग्राहक बन अपने जाल में फंसा हाईस्कूल की फर्जी मार्कशीट के साथ दबोचा था। जबकि गिरोह के पांच आरोपित कानपुर के शुभम दुबे, शेखू, छतरपुर निवासी मयकं भारद्वाज, हैदराबाद का मनीष उर्फ रवि, गाजियाबाद निवासी विनीत फरार हैं, जिनकी तलाश में टीमें लगी हैं।

यहां फैला नेटवर्क

गिरोह ने उ.प्र, उत्तराखंड, बिहार, मध्य प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, सिक्किम, आंध्र प्रदेश, झारखंड में अपना नेटवर्क फैला रखा है। आरोपितों ने पुलिस को बताया कि वह चार तरह से लोगों की डिग्री और मार्कशीट बनवाते थे, जिसकी पूर्व में कोई मार्कशीट नहीं होती थी और उसकी किसी भी वर्ष की बनाकर दे दी जाती थी। इसके अलावा अगर किसी ने 2015 में इंटर किया था, तो ग्रेजुएशन की 2018 और 2021 में एलएलबी की डिग्री बनवा देते थे, जिससे ऐसे लगे जैसे वह लगातार विश्वविद्यालय में पढ़ता रहा था।

फर्जी डिग्री से अलग-अलग जगहों पर कर रहे नौकरी

विश्वविद्यालय में चाहे जितनी सीटें हों, लेकिन जब कोई अपने मनपसंद विश्वविद्यालय की डिग्री-मार्कशीट बनवाना चाहता है तो सीटों से ज्यादा अवैध तरह से उसकी डिग्री-मार्कशीट बनाकर ज्यादा रकम वसूलते थे। वहीं, बहुत से ऐसे लोग भी हैं, जो अलग-अलग जगहों पर नौकरी कर रहे हैं। उनके पास अब पढ़ाई करने या विद्यालय जाने का समय भी नहीं है तो उनका प्रवेश करा देते थे और बिना जाए व परीक्षा दिए बगैर उन्हें पास करवाते हुए मार्कशीट-डिग्री बनवा देते थे। आरोपितों के डिग्रियां बनाने तरीकों को सुनकर पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए। डीसीपी दक्षिण दीपेंद्रनाथ चौधरी ने बताया कि मामले में जांच अभी चल रही है। कई और तथ्यों और साक्ष्यों का जांचा जा रहा है, जो भी मार्कशीट व डिग्रियां बरामद हुई हैं। उनका सत्यापन चल रहा है।

इन विद्यालय से बनवाते थे डिग्री-मार्कशीट

पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि आरोपितों का गिरोह छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर, लिंग्या वि. फरीदाबाद, मंगलायतन वि. अलीगढ़, जेएस वि. शिकोहाबाद फिरोजाबाद, एशियन वि. मणिपुर, ग्लोकल वि. सहारनपुर, सिक्किम प्रोफेशनल वि. सिक्किम, प्रज्ञान इंटरनेशनल वि. झारखंड, स्वामी विवेकानंद सुभारती वि. मेरठ, हिमालयन वि. ईटानगर, हिमालयन गढ़वाल वि. उत्तराखंड, श्री कृष्णा वि. छतरपुर, मोनाड वि.हापुड़, जामिया उर्दू अलीगढ़ व माध्यमिक शिक्षा परिषद फर्जी डिग्री-मार्कशीट बनवाकर बेचते थे।