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Board Exam तनाव छीन रहा बच्चों की जिंदगियां, कानपुर में दो और इटावा में एक छात्रा ने दी जान

Published: Sun, 22 Feb 2026 03:04 PM (IST)

Board Exam Stress: बोर्ड परीक्षा के तनाव के कारण कानपुर में दो और इटावा में एक छात्रा ने आत्महत्या कर ...और पढ़ें

प्रकृति और अनुष्का की फाइल फोटो। स्वजन

प्रकृति और अनुष्का की फाइल फोटो। स्वजन

HighLights

  1. कानपुर में दो छात्राओं ने बोर्ड परीक्षा तनाव में जान दी।

  2. इटावा में छात्रा ने खराब गणित पेपर के बाद आत्महत्या की।

  3. अभिभावकों को बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए।

डिजिटल डेस्क, कानपुर। सीबीएसई और यूपी बोर्ड परीक्षा शुरू होते ही तीन जिंदगियां छिन गईं। बोर्ड परीक्षा के तनाव में आकर जान दे रहे छात्रों ने अभिभावकों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। कानपुर में दो छात्राओं और इटावा में एक छात्रा ने आत्महत्या कर ली। अभिभावकों के अनुसार परीक्षा के दबाव और पेपर अच्छा न होने की वजह से बच्चों ने आत्महत्या कर ली। ऐसे में बच्चों के मानसिक तनाव को समझने की जरूरत है।

Kanpur में 12th की छात्रा ने फंदा लगाकर दी जान

मूलरूप से इटावा के बकेवर निवासी सुनील कुमार सिंह एचबीटीयू में मैकेनिक हैं। पत्नी नेमा, बेटी 17 वर्षीय प्रकृति सिंह व बेटे अविरल के साथ कैंपस में ही रहते हैं। प्रकृति मंधना स्थित एनएलके एकेडमी में सीबीएसई से इंटर कर रही थी। पिता ने बताया कि अगली परीक्षा एकाउंटेंसी की 24 फरवरी को थी, जिससे वह घबरा रही थी जिससे उसे समझाया था। रात एक बजे तक वह पढ़ रही थी। जब सुबह उठा तो उसे आवाज दी। लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं आने पर दरवाजा खोला तो बच्ची का शव फंदे से लटक रहा था। पिता ने बताया कि वह बेटी को समझाते थे कि परीक्षा के दबाव में न आना लेकिन वह फिर भी परेशान हो जाती और ज्यादा पढ़ने लगती थी।

22 फरवरी को Etawah में गणित का पेपर खराब होने पर छात्रा ने फंदा लगा दी जान

शहर के फ्रेंड्स कालोनी के यशोदा नगर निवासी सत्यवीर सिंह की 15 वर्षीय बेटी अनुष्का गौतम सीबीएसई बोर्ड की कक्षा 10 की परीक्षाएं दे रही थी। शुक्रवार दोपहर उसकी मां हेमलता और छोटा भाई लकी बाजार चले गए और उस समय अनुष्का घर पर अकेली थी। शाम को जब मां और भाई वापस घर लौटे तो मेन गेट खुला हुआ था। जब अंदर जाकर देखा तो अनुष्का कमरे में दुपट्टे के सहारे पंखे से लटकी हुई थी। अनुष्का के पिता सत्यवीर बीएसएफ में कांस्टेबल के पद पर तैनात हैं। वर्तमान में उनकी तैनाती राजस्थान के श्रीगंगानगर में है। हाल ही में वे दिल्ली में आयोजित एआइ समिट में ड्यूटी पर गए हुए थे। वे घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली से अवकाश लेकर घर आ गए। उन्होंने बताया 17 तारीख से उसकी परीक्षाएं शुरू हुई थीं। पहला पेपर गणित का था, जिसे लेकर वह काफी चिंतित थी। परीक्षा देकर घर लौटने के बाद अनुष्का ने बताया था कि उसका गणित का पेपर अच्छा नहीं हुआ।

22 जनवरी को भी Kanpur में 10th की छात्रा ने कर ली थी आत्महत्या

कानपुर के जाजमऊ थाना क्षेत्र में हाई स्कूल की छात्रा ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मूलरूप से बेकनगंज निवासी फुरकान बुढ़िया घाट में परिवार के साथ किराए पर रह रहे हैं। फुरकान के अनुसार उनकी छोटी बेटी इकरा हाई स्कूल की छात्रा थी। इकरा हाई स्कूल बोर्ड परीक्षा को लेकर तनाव में दिखती थी। उसका बीते दो दिनों से खाना पीना भी कम हो गया था। फुरकान के अनुसार देर शाम को वह घर पहुंचे तो अंदर से कुंडी बंद थी। पत्नी बड़ी बेटी के साथ लालबंगला बाजार गई थीं। जब उन्होंने खिड़की से अंदर झांका, तो इकरा पंखे में दुपट्टे के सहारे लटकी दिखी थी। जाजमऊ थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह का कहना है कि पूछताछ में स्वजन परीक्षा को लेकर तनाव में होने की बात कह रहे हैं।

3 जनवरी को Kanpur में सेमेस्टर में बैक आने से आहत बीएएमएस छात्र ने भी दी थी जान

बिठूर थाना क्षेत्र के बगदौधी बांगर में किराए के कमरे में रह रहे रामा मेडिकल कॉलेज के बीएएमएस तृतीय वर्ष के छात्र ने सेमेस्टर परीक्षा में लगातार बैक आने से मानसिक तनाव में आकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। दोस्तों के कमरे पर पहुंचने पर घटना की जानकारी हुई। मूल रूप से कर्वी, चित्रकूट निवासी 27 वर्षीय शैलेंद्र कुमार बगदौधी बांगर में शिव बरन पाल के मकान में किराए पर रहकर रामा मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रहा था।

यहां भी बच्चों ने दी जान

  • सुलतानपुर में 12वीं की छात्रा ने दी जान
  • आगरा में 15 साल की 10वीं की छात्रा ने आत्महत्या की

 

अभिभावक इसका ख्याल रखें

  • बच्चों से रोज खुलकर बातचीत करें और उनकी बातों को गंभीरता से सुनें।
  • पढ़ाई, परीक्षा और परिणाम को लेकर अत्यधिक दबाव न बनाएं।
  • बच्चों की तुलना दूसरों से न करें, हर बच्चे की क्षमता अलग होती है।
  • तनाव, उदासी, चिड़चिड़ापन या अकेले रहने जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत विशेषज्ञ की मदद लें।
  • बच्चों को यह भरोसा दिलाएं कि किसी भी परिस्थिति में परिवार उनके साथ खड़ा है।