इटावा, जेएनएन। ग्वालियर-इटावा रेलमार्ग पर बहुप्रतीक्षित इलेक्ट्रिक इंजन ट्रेन सेवा शुरू हो गई है। रविवार को पहली इलेक्ट्रिक इंजन की ट्रेन दौड़ी। अबतक इस ट्रैक पर डीजल इंजन की ट्रेन संचालित हो रही थी और इटावा स्टेशन पर इंजन बदला जाता था, जिससे लेटलतीफी की स्थिति बनती थी। लेकिन, अब इस ट्रैक पर ट्रेनों की लेटलतीफी की समस्या नहीं रहेगी। शनिवार को देर शाम ग्वालियर से विद्युत इंजन लगाकर मालगाड़ी को भिंड-इटावा होते हुए कानपुर की ओर भेजा गया। उधर, रविवार को ग्वालियर से इटावा के लिए यात्री ट्रेन को विद्युत इंजन लगाकर रवाना किया। अब इस रेलमार्ग पर नई यात्री ट्रेनें चलाने या कुछ ट्रेनों का विस्तार किए जाने के प्रबल आसार हैं।

1985 में तत्कालीन रेल मंत्री ग्वालियर महाराज माधवराव सिंधिया ने ग्वालियर-इटावा रेलमार्ग की परियोजना मंजूर करके इसे अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बताया था। 2014 में मोदी सरकार गठित होने पर निर्माण कार्य शीघ्रता से पूर्ण कराया गया। इससे 18 फरवरी 2016 को इस रेलमार्ग पर यात्री ट्रेनों का परिचालन डीजल इंजन से शुरू हुआ। दो साल पूर्व इस मार्ग पर विद्युतीकरण कार्य शुरू कराया गया, जो बीते माह करीब 90 करोड़ रुपये की लागत से पूर्ण हुआ। बीते 29 सितंबर को ट्रैक को हरी झंडी दी गई। स्टेशन अधीक्षक पीएम मीना ने बताया कि विद्युत इंजन से मालगाड़ी का परिचालन सफल होने पर अब यात्री ट्रेन को चलाया गया। रविवार सुबह इटावा-झांसी लिंक एक्सप्रेस को डीजल इंजन से भेजा गया, उधर से इस ट्रेन में विद्युत इंजन लगाया जाएगा।

शंटिग की कवायद बंद : बीते पांच साल से इस मार्ग की ट्रेनों का इंजन बदलने का कार्य इटावा जंक्शन पर होता था। रेलवे की भाषा में इस शंटिग कहते हैं। अब विद्युत रेल सेवा शुरू होने से शंटिग की कवायद बंद हो गई। इससे पूर्व इटावा बटेश्वर आगरा लाइन का विद्युतीकरण हो गया था। अब शंटिग सिर्फ इटावा-मैनपुरी लाइन पर होगी।

Edited By: Abhishek Agnihotri