कानपुर, जागरण संवाददाता। नगवां और घुरवाखेड़ा गांव में सरकारी जमीनों पर लेखपाल की मिलीभगत से अवैध कब्जे हो गए हैं। यहां की करीब नब्बे प्रतिशत सरकारी जमीन पर भूमाफिया काबिज हैं। लेखपाल और कानूनगो के संरक्षण में कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। कागजों में हेरफेर कर सुरक्षित जमीनों को भी बेंच दिया गया। नर्वल तहसील में शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस पर जिलाधिकारी नेहा शर्मा से चकेरी के महेश वर्मा और लवी प्रसाद ने यह शिकायत की। इनके अतिरिक्त कई और लोगों ने भी सरकारी जमीनों पर कब्जे होने की शिकायत की जिससे जिलाधिकारी का पारा चढ़ गया। उन्होंने एसडीएम अमित कुमार और तहसीलदार संजय सिंह को जमकर फटकार लगाई जबकि लेखपाल मोहित सचान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।जिलाधिकारी ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि जल्द ही वह खुद गांव आकर निरीक्षण करेंगी।

नर्वल तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस पर सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों की शिकायतें सबसे अधिक रहीं।इसमें ग्राम प्रधानों ने भी लेखपालों की भूमाफिया से मिलीभगत और सरकारी जमीनों पर कब्जे के खेल का खुलासा किया। भीतरगांव कुंदौली की ग्राम प्रधान की शिकायत पर डीएम ने कहा कि वह जल्द गांव आकर खुद निरीक्षण करेंगी।सरसौल बड़ागांव की प्रधान रेनू उत्तम ने लेखपाल के खिलाफ शिकायत करते हुए बताया कि लेखपाल की मिलीभगत से खलिहान, तालाब, चरागाह और नवीन परती की जमीनें भूमाफिया के कब्जे में हैं।विकास कार्यों को कराने के लिए सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं हो पा रही है।कई शिकायतकर्ताओं ने बताया कि एसडीएम व तहसीलदार से दर्जनों बार शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।अपने सामने अवैध कब्जों से जुड़ी शिकायतों का अंबार लगते डीएम ने एसडीएम व तहसीलदार को भी फटकार लगाई और चेतावनी दी कि आगे ऐसी शिकायतें मिली तो वह भी नहीं बचेंगे।

डीएम ने अधिकारियों को सख्त हिदायत देते हुए एक सप्ताह के अंदर सभी शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करें।उन्होंने कहा कि अभी भी बड़े भूमाफिया कार्रवाई से बचे हैं।चिन्हित कर भूमाफिया पर कठोर कार्रवाई करें।आईजीआरएस में आयी शिकायतों को समय से निस्तारण के निर्देश दिए।कुल 71 शिकायतों में सबसे अधिक 38 शिकायतें राजस्व विभाग की थीं जिसमें पांच का निस्तारण हुआ।

Edited By: Abhishek Verma