मोहम्मद गौरी के सेनापति की मजार ध्वस्त कर चर्चा में आए थे इटावा DFO 'नायक', कानपुर में भी दी थीं सेवाएं
प्रभागीय वन अधिकारी विकास नायक का कार दुर्घटना में निधन हो गया। वे इटावा सफारी के पास मोहम्मद गौरी के ...और पढ़ें

HighLights
कार दुर्घटना में प्रभागीय वन अधिकारी विकास नायक का दुखद निधन।
इटावा में मोहम्मद गौरी के सेनापति की मजार ध्वस्त कर चर्चा में आए।
कानपुर का अतिरिक्त प्रभार भी सफलतापूर्वक संभाला था उन्होंने।
जागरण संवाददाता, कानपुर। कार दुर्घटना में दिवंगत इटावा के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) विकास नायक जिले की कमान संभाल चुके थे। प्रभागीय वन अधिकारी दिव्या के स्थानांतरण के बाद उनको इटावा के साथ कानपुर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था।
यह प्रभार उनके पास 20 मई से 20 जून एक महीने तक रहा। इस दौरान उन्होंने जुलाई में होने वाले वन महोत्सव का सफल आयोजन कराया। उन्होंने वन विभाग की नर्सरियों में तैयार की गई 52 लाख पौधों की खेप को कानपुर के अतिरिक्त दूसरे जिलों में भेजने की रूपरेखा भी तय की। इस बीच प्रभागीय वन अधिकारी आकांक्षा जैन कानपुर आ गईं।
विकास नायक से यहां का अतिरिक्त प्रभार ले लिया गया। विकास नायक इटावा सफारी के पास वन विभाग की संरक्षित भूमि पर कब्जा कर बनी मोहम्मद गौरी के सेनापति शम्सुद्दीन की मजार को ध्वस्त करा चर्चा में आए थे। उन्होंने मजार को ध्वस्त कराने के बाद वहां पौधारोपण करवाया था।
वन विभाग के अधिकारियों ने विकास नायक के निधन पर शोक व्यक्त किया। यहां से मुख्य वन संरक्षक, प्रभागीय वन अधिकारी सहित अन्य अधिकारी सैफई रवाना हो गये हैं। वहीं पर पोस्टमार्टम हाउस में उनका शव रखा गया है। विकास नायक मूलरूप से राजस्थान के नागौर जिले के थे। इटावा से पहले वे फिरोजाबाद व मैनपुरी में भी तैनात रहे थे।
