कानपुर (राजीव सक्सेना)। वरिष्ठ नागरिक बचत योजना में बुजुर्गों के निधन पर कोई कटौती नहीं की जाएगी, इस आदेश को बैंकों ने अपने साफ्टवेयर पर 17 साल अपडेट ही नहीं किया। अब कोरोना के दौरान जब बहुत अधिक संख्या में वरिष्ठ नागरिकों का निधन हुआ और इस योजना से जुड़े बुजुर्गों के नामिनी को कटौती कर धनराशि जारी की गई तो शिकायतें भारतीय बैंक संघ तक पहुंचीं। इस पर हैरान हुए संघ ने सभी बैंकों को 2004 के संशोधन की याद दिलाई और साफ कहा कि वे अपने साफ्टवेयर को अपडेट कर लें। अब कटौती को लेकर किसी की शिकायत नहीं आनी चाहिए।

सीनियर सिटीजन के लिए केंद्र सरकार की वरिष्ठ नागरिक बचत योजना है। इस समय इसमें ब्याज दर 7.4 फीसद है, जो सामान्य एफडी के ब्याज दर से ज्यादा है। इसलिए सेवानिवृत लोग इस खाते में एक बार में पैसा लगा देते हैं। इस योजना में बैंक और डाकघर दोनों के जरिए शामिल हुआ जा सकता है। इस योजना की शुरुआत में मृत्यु होने पर किए जाने वाले भुगतान से कटौती के निर्देश थे। वर्ष 2004 में इसमें संशोधन किया गया और कहा गया कि मृत्यु की दशा में कोई पेनाल्टी नहीं काटी जाएगी लेकिन बैंकों ने कटौती को खत्म करने का कोई ङ्क्षलक अपने साफ्टवेयर में नहीं डाला जिससे पिछले 17 वर्ष यह कटौती लगातार हो रही थी।

कोरोना काल में काफी वरिष्ठ नागरिक भी काल कवलित हुए। उनके नामिनी से भुगतान के दौरान कटौती की गई तो लोगों ने अलग-अलग स्तर से अपनी शिकायतें ऊपर तक भेजीं। भारतीय बैंक संघ तक यह शिकायत पहुंची तो उसने पाया कि 2004 का जो संशोधन लागू किया था, बैंकों ने अपने साफ्टवेयर में उसकी कोई व्यवस्था ही नहीं की। बैंक संघ ने अब 22 जुलाई को सभी बैंकों को तुरंत अपने साफ्टवेयर में बदलाव करने और आगे किसी भी भुगतान में पेनाल्टी न काटने के निर्देश दिए हैं।

इनका ये है कहना

  • वरिष्ठ नागरिकों के लिए ये राहत भरा कदम है। 17 वर्ष से बैंक इसमें संशोधन नहीं कर रहे थे। इस संशोधन से नामिनी को मिलने वाले धन में कटौती नहीं होगी। - सुरेश चंद्र, खाताधारक
  • जब 2004 से ये संशोधन लागू किया गया था तो इस बीच जितने लोगों की कटौती की गई है, उनके नामिनी को उस कटौती का धन लौटाया जाए। - आशीष कुमार मिश्रा, महामंत्री, वी बैंकर्स
  • अभी तक बैंक ये कटौती कर रहे हैं। अब भारतीय बैंक संघ के आदेश पर इस कटौती को बंद किया जाएगा।                                                                                             - एके वर्मा, अग्रणी जिला प्रबंधक 

Edited By: Akash Dwivedi