कानपुर, जेएनएन। भइया, हमाई बिटिया का डेंगू लील गा, दुई अस्पताल में परी हैं। अइस आफत हमार गांव मा कबहूं न आई रहे। एक होए तो कहा जाए, हिन तो घर-घर मा बीमार परे हैं। कहते-कहते कुरसौली गांव की पूर्व प्रधान फूल कुमारी फफक पड़ीं। मंगलवार को गांव पहुंची दैनिक जागरण टीम ने से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि कउनो सुनै वाला नाही, कहीके पास जाकर टेसुआ बहाई। टीम ने उन्हें ढांढस बंधाया और आगे बढ़ गई।

कुरसौली गांव में प्रमुख सचिव कर चुके निरीक्षण

कल्याणपुर ब्लाक के कुरसौली गांव में वायरल और डेंगू बुखार जानलेवा हो गया है। एक ही पहले ही यहां प्रमुख सचिव अनिल गर्ग ने जाकर हालात का जायजा लिया था। मंगलवार को दैनिक जागरण की टीम ने भी गांव पहुंचकर ग्रामीणों का दर्द जाना। फूल कुमारी से मिलकर टीम जब आगे बढ़ी तो रास्ते में ही उनके पति हरीशंकर कुरील मिल गए। वे अस्पताल से ही लौट रहे थे। बातचीत में उनके भी आंसू झलक आए। बोले तीन बेटियों में से अब दो ही बची हैं। एक को डेंगू ने लील लिया। संजोली और संगीता भी निजी अस्पताल में डेंगू का इलाज करा रही हैं। आगे भगवान की मर्जी है।

आफत बनकर आवा है बुखार

चंद्रशेखर तिवारी बोले कि, हमरे घर मा बुखार आफत बनिके आवा है। हमार तो घरै खाली हुई गा। पहले हम, फिर बेटवा, बहुरिया और अब घरवाली, सबै बीमार पडिग़े। बेटवा आ गा, बहुरिया नर्सिंग होम मा परी है। हमईं घर मा रहि गए हन। बेटे को मंगलवार को ही छुट्टी मिली है। खाने-पीने का बंदोबस्त पड़ोसी कर रहे हैं। कमोवेश यही हाल, ओमप्रकाश तिवारी के घर का है। वह भी घर पर अकेले मिले। दो साल पहले उनकी पत्नी का देहांत हो चुका है। उनकी तीनों बेटियां डेंगू और बुखार की चपेट में आकर निजी अस्पताल में इलाज करा रही हैं। बेटा देखभाल में लगा है। घर में रोटी बनाने वाला कोई नहीं है, पड़ोसी खाना पहुंचा रहे हैं। यह तीन घर नहीं, बल्कि ऐसे हालात 35-40 घरों के हैं, जहां से तीन-चार सदस्य बीमार होकर अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं।

आबादी 2600 और दौ सौ से अधिक बीमार

कुरसौली गांव की आबादी 2600 है। इसमें से 200 से ज्यादा बीमार हैं। ग्रामीणों के मुताबिक सीएमओ डा. नैपाल सिंह को समस्या बताई गई, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया। सोमवार को प्रमुख सचिव निरीक्षण करने आए तो आंकड़ों को छिपाने का खेल शुरू कर दिया। उन्हें सिर्फ डेंगू पीडि़तों के घर ले जाया गया। हालांकि प्रमुख सचिव ने ग्राम विकास अधिकारी शालिनी मिश्रा को निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए थे। सूची में 33 मरीजों के नाम दिए गए है। सीएमओ को इनकी पड़ताल करनी थी, लेकिन एसीएमओ सिर्फ दो ही निजी अस्पतालों में गए। शाम तक तीन और मरीज अस्पतालों में भर्ती कराए गए।

35 घर सर्वाधिक प्रभावित : गांव में 35 घर सर्वाधिक प्रभावित हैं। अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है। 6-7 लोग गंभीर स्थिति में हैं। अन्य 36 लोग निजी अस्पतालों में भर्ती हैं।

बिधनू : डेंगू की दस्तक, 42 को बुखार

बिधनू के मन्नीपुरवा गांव की पूर्व ग्राम प्रधान 65 वर्षीय राजरानी को डेंगू हो गया है। हृदय रोग संस्थान से घर आने के बाद से उन्हें तेज बुखार आ रहा था। स्वजन उन्हें सोमवार को सीएचसी लेकर आए और मलेरिया-डेंगू की जांच के लिए सैंपल लिया गया। डेंगू की पुष्टि के बाद खलबली मच गई। मंगलवार दोपहर स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ डा. आर्यन ङ्क्षसह गांव पहुंचे और बुखार पीडि़त का हाल जाना। गांव में 42 बुखार पीडि़त मिले, उसमें से 16 की डेंगू जांच और 26 की मलेरिया की स्लाइड बनाई गई। गांव में फाङ्क्षगग और एंटी लार्वा का छिड़काव भी कराया गया। ग्रामीण सीता, महेश, गोङ्क्षवद, रामकली, राधेलाल समेत बड़ी संख्या में बुखार पीडि़त मिले हैं। सीएचसी अधीक्षक डा. एसपी यादव ने बताया कि क्षेत्र का पहला डेंगू मरीज मिला है।

बिल्हौर : अनुपपुरवा में नौ को डेंगू, 28 बुखार पीडि़त

अनूपपुरवा गांव में शनिवार को डेंगू के 2 मरीज मिले थे, जबकि मंगलवार को आई रिपोर्ट में गांव के सात और मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। गांव में अबतक नौ मरीज मिले हैं। मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम लेकर सीएचसी अधीक्षक डा अरङ्क्षवद भूषण गांव गए। डेंगू के मरीजों की स्थिति देखी। गावं में मेडिकल टीम ने 40 ग्रामीणों की जांच की, जिसमें 28 बुखार पीडि़त मिले हैं। उनमें से 21 मरीजों के सैंपल डेंगू की जांच के लिए लिए हैं। गांव में दवा का छिड़काव भी कराया गया।

महाराजपुर : करबिगवां में हर घर में बुखार से पीडि़त

नर्वल के करबिगवां गांव के हर घर में बुखार पीडि़त हैं। घनी आबादी के बीच कई जगह गोबर व कूड़े के ढ़ेर लगे हैं। नालियों और गलियों में जलभराव है। उसमें मच्छर पनप रहे हैं, जो बीमारियों की वजह बन रहे हैं। सोमवार को सीएचसी सरसौल की टीम भी गांव पहुंची और 97 ग्रामीणों का चेकअप किया। वायरल बुखार व डेंगू से पीडि़त 15, मलेरिया के संदेह में 63 पीडि़तों की स्लाइड बनाई गई। एंटी लार्वा का छिड़काव भी कराया। करबिगवां के हरिहर ङ्क्षसह ने बताया कि गंदगी से जीन दूभर है। सफाई होती नहीं है। गांव पिछले वर्ष 14 ग्रामीणों की बुखार से मौत हुई थी। इस बार भी वैसी ही स्थितियां हैं। बुखार पीडि़त राजरानी, विपिन, अर्जुन रैदास, विनीता, अजय, अनिल, राकेश, सुनीता, शांति, रीना और कमला बेहाल हैं। गांव के प्रधान जगतपाल की बेटी आरती को भी बुखार है। सीएचसी सरसौल अधीक्षक डा. रमेश कुमार ने बताया कि वायरल बुखार के लक्षण ग्रामीणों में पाए गए हैं।

Edited By: Abhishek Agnihotri