सीएसए और सीएसजेएमयू मिलकर करेंगे कृषि अनुसंधान, महिलाओं को मिलेगा सशक्तिकरण का अवसर
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) और छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के बीच कृषि अनुसंधान और शिक्षा ...और पढ़ें

सीएलए में आयोजित किसान मेला में बोलते सीएसजेएमयू की कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक। मंचासीन विधायक नीलिमा कटियार व अन्य। प्रबंधन
HighLights
सीएसए-सीएसजेएमयू कृषि अनुसंधान, शिक्षा हेतु एमओयू करेंगे
किसान मेले में महिला सशक्तिकरण सत्र में घोषणा हुई
कृषि में महिलाओं की उद्यमिता, कौशल विकास पर जोर
जागरण संवाददाता, कानपुर। चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) और छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के बीच जल्द ही समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होंगे। इसके तहत दोनों विश्वविद्यालय कृषि अनुसंधान, शिक्षा, प्रशिक्षण और नवीन तकनीकों के हस्तांतरण के क्षेत्र में संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। यह घोषणा शुक्रवार को सीएसए में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी के दौरान महिला सशक्तिकरण पर आयोजित विशेष सत्र में मुख्य अतिथि व सीएसजेएमयू के कुलपति डा. विनय कुमार पाठक ने की।
उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं को उद्यमिता, कौशल विकास और स्वरोजगार से जोड़ना समय की जरूरत है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और वे परिवार के साथ समाज के विकास में भी अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेंगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सीएसए के कुलपति डा. संजीव गुप्ता ने की। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए अंत्योदय योजना सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ महिला कृषकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना जरूरी है। कौशल विकास प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराकर महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। उन्होंने विश्वविद्यालय की ओर से महिला कृषकों को हरसंभव वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग देने का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम में विधायक नीलिमा कटियार, सरसौल की ब्लाक प्रमुख डा. विजय रत्ना तोमर, गृह विज्ञान महाविद्यालय की अधिष्ठाता डा. सीमा सोनकर, कृषि संकाय के अधिष्ठाता डा. कौशल कुमार तथा निदेशक प्रसार एवं उद्यान संकाय के अधिष्ठाता डा. विवेक कुमार त्रिपाठी मौजूद रहे। विशेष सत्र में विभिन्न जनपदों से आई महिला कृषकों ने भाग लिया।
विशेषज्ञों ने कृषि आधारित आजीविका, मूल्य संवर्धन, खाद्य प्रसंस्करण, पोषण वाटिका, कृषि उत्पादों के विपणन और लघु एवं कुटीर उद्योगों पर चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि बीज चयन, बुवाई, निराई-गुड़ाई, कटाई, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और खाद्य प्रसंस्करण सहित पूरी कृषि मूल्य शृंखला में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्हें आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण, वित्तीय संसाधनों और बाजार से जोड़कर कृषि को अधिक समावेशी, टिकाऊ और लाभकारी बनाया जा सकता है।
