कानपुर, [राजीव सक्सेना]। मध्यकालीन युग में रीति काल के कवि का ज्यों नाविक के तीर, देखन में छोटन लगे, घाव करे गंभीर... दोहा  सीजीएसटी के मौजूदा अर्थशास्त्र पर एकदम फिट बैठ रहा है। जिस तरह नायक फिल्म में अभिनेता अनिल कपूर ने मुख्यमंत्री बनने के बाद जगह जगह लेटर बॉक्स लगवाकर जनता की शिकायतों को गोपनीय ढंग से लेकर समाधान का अनूठा तरीका अख्तियार किया था। ठीक उसी तरह से सीजीएसटी के इस फिल्मी बॉक्स ने भी पूरा सिस्टम बदल दिया है। छोटे से बॉक्स ने केंद्रीय माल एवं सेवाकर (सीजीएसटी) विभाग को करोड़ों की कमाई करा दी है। 

भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने को लगाई पेटिका

संगठित वसूली के आरोप में सीबीआइ की कार्रवाई में सीजीएसटी आयुक्त संसारचंद की गिरफ्तारी के बाद विभाग में अविश्वास का माहौल था। डेढ़ वर्ष तक यहां स्थायी आयुक्त तैनात ही नहीं हुए। दो माह पहले तैनात किए गए आयुक्त पीके कटियार ने उद्यमियों का विश्वास हासिल करने के लिए पहल की और विभागीय भ्रष्टाचार व करपवंचना की शिकायत के लिए पेटिका लगवाई। गोपनीय रखने के भरोसे पर सूचनाएं मिलनी शुरू हुई।

दो करोड़ से अधिक का मिला राजस्व

इन बॉक्स में आई गोपनीय सूचनाओं ने विभाग को डेढ़ माह में काफी राजस्व दिलाया है। शिकायतें इतनी सटीक निकली कि जांच करने पर सीजीएसटी को करोड़ों रुपये का राजस्व मिलने की राह खुल गई। इन शिकायतों पर जांच के बाद औद्योगिक तेल कंपनी से 47.4 लाख, साबुन निर्माता से 34 लाख, साबुन विक्रेता से 65.1 लाख रुपये टैक्स वसूला गया। अन्य कंपनियों से भी 70 लाख रुपये से अधिक राजस्व वसूला गया है। वहीं आधा दर्जन कंपनियों की जांच में बड़ा टैक्स मिलने की संभावना है।

-विभाग को लगातार सूचनाएं मिल रही हैं। लोग सामान्य शिकायत के बजाए तथ्यात्मक शिकायत करें तो जांच और आसान होगी और कर अपवंचना करने वालों शिकंजा कसा जा सकेगा। -पीके कटियार, आयुक्त, सीजीएसटी आयुक्तालय।

Posted By: Abhishek

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