जागरण संवाददाता, कानपुर : ब्रह्मावर्त कोआपरेटिव बैंक प्रबंधन ने 1.32 करोड़ रुपये का गबन किया था। यह वह राशि थी जिसे जांच में गबन व अपहरण का नाम दिया गया। वहीं 5.01 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता भी की गई है।

ब्रह्मावर्त कोआपरेटिव बैंक में प्रबंधन ने 38.99 करोड़ रुपये की गड़बड़ी की थी। इसमें बैंक के अधिकारियों ने 1.32 करोड़ का गबन कर लिया था। जांच में पता ही नहीं चला कि यह राशि कहां चली गई और किसने निकाल ली। बैंक का लाइसेंस रद होते समय इसकी जानकारी भी नहीं थी कि ऐसा भी कुछ हुआ है। इसी तरह 5.01 करोड़ रुपये को जमाकर्ताओं की जानकारी में दिए बिना एक खाते से निकाल किसी और जगह लगा दिया गया। 32.64 करोड़ की राशि ऐसी भी रही जो लोन के रूप में जारी कर अपनी जेब में रख ली गई। इतना सब होने के बाद भी सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने 39 करोड़ की जगह सात करोड़ हड़पने की बात कही है। करीब 32 करोड़ रुपये जांच में कम कर दिए गए हैं। इस संबंध में अपर निबंधक विनय मिश्रा से बात करने का प्रयास किया गया तो फोन नहीं उठा। बात करने के लिए किए गए संदेश पर भी जवाब नहीं दिया गया।

दस खंड विकास अधिकारियों का वेतन रोका

जासं, कानपुर : महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत हो रहे कार्यों की प्रत्येक माह जांच के आदेश का पालन न करने पर दस खंड विकास अधिकारियों का वेतन रोक दिया गया है। अब उनके वेतन का आहरण तब होगा जब वे 20-20 कार्यों का निरीक्षण कर आख्या देंगे।

गांवों में मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों में अनियमितता रोकने और अगर कहीं हुई हो तो वह पकड़ में आ जाए इसलिए प्रत्येक ब्लाक के खंड विकास अधिकारी को अपने- अपने ब्लाक के 20- 20 गांवों में जांच करनी थी। उसकी आख्या उपायुक्त श्रम एवं रोजगार और सीडीओ को भेजनी थी, लेकिन खंड विकास अधिकारी तीन माह से इस आदेश का पालन नहीं कर रहे थे। सीडीओ डा. महेंद्र कुमार ने जब आख्या की जानकारी की तो पता चला कि कहीं जांच ही नहीं हुई है। इस पर उन्होंने सरसौल, भीतरगांव, पतारा, घाटमपुर, बिधनू, कल्याणपुर, चौबेपुर, शिवराजपुर, ककवन और बिल्हौर ब्लाक के खंड विकास अधिकारी का वेतन रोक दिया है।