कानपुर [शशांक शेखर भारद्वाज]। किसी भी हादसे अथवा अवस्था में घायल होने पर रक्त का निरंतर बहना ही खतरनाक होता है। डॉक्टर भी कहते हैं कि दुर्घटना के घायलों के लिए पहला एक घंटा गोल्डन ऑवर होता है, यदि इस दौरान फस्र्ट एड से खून का बहना रोक लिया जाए तो जान बचाने की संभावना बढ़ जाती है। आइआइटी कानपुर के एक ऐसा प्राकृतिक पॉलीमर बेस्ड बैंडेज तैयार किया है, जो तीस सेकेंड में खून को जमाकर बहना रोक देगा। देसी हीमोस्टेटिक टेप का क्लीनिकल ट्रायल एम्स दिल्ली में शुरू भी हो चुका है। 

डेढ़ साल में विकसित हुआ हीमोस्टेटिक बैंडेज

कानपुर आइआइटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान)के बायोलॉजिकल साइंस एंड बायो इंजीनियरिंग (बीएसबीई) विभाग ने स्वदेशी तकनीक से पहला प्राकृतिक पॉलीमर बेस्ड स्वदेशी हीमोस्टेटिक बैंडेज टेप तैयार किया है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) के इंपैक्टिंग रिसर्च इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी (इमप्रिंट) के सहयोग से प्रो. अशोक कुमार और पीएचडी कर रहे सैय्यद मुंतजिर ने डेढ़ साल में इस बैंडेज को विकसित किया। इसे ब्रेस्ट इंप्लांट, लिवर सर्जरी के समय भी लगाया जा सकता है। वहीं, चोट लगने पर बिना विशेषज्ञ के भी आसानी से लगा सकते हैं। जानवरों पर सफल परीक्षण के बाद दिल्ली एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) में क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो गया है। शुरुआती परिणाम सकारात्मक आने के बाद पेटेंट कराने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।

दुर्घटना के घायल और जवानों के गोली लगने पर होगा मददगार

वाहन दुर्घटना में घायल व्यक्ति हो या गोलाबारी में घायल जवान, अधिक खून बह जाने के कारण जान नहीं गंवानी पड़ेगी। देसी हीमोस्टेटिक टेप इस स्थिति में मददगार साबित होगा। शरीर के किसी भी हिस्से से कितना ही तेज रक्तस्राव क्यों न हो रहा हो, इस टेप से महज 30 सेकेंड और अधिकतम 70 सेकेंड में पूरी तरह रोका जा सकेगा। यह वह समय है, जिसमें खून का बहाव रोक दिया जाए तो जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। प्राथमिक उपचार किट में इस टेप के शामिल हो जाने पर आशातीत परिणाम की उम्मीद की जा रही है।

जानें, कैसे काम करता है टेप

चोट लगने पर शरीर की कोशिकाएं और ऊतक समय के अनुसार उसे स्वत: भर देते हैं। पॉलीमर हीमोस्टेटिक बैंडेज भी ऐसे ही काम करता है। इसके चार मुख्य भाग हैं। पहला, नैचुरल पॉलीमर, यह प्लेटलेट्स को रोकता है। दूसरा, मॉलीक्यूलर सीव, यह आण्विक छलनी है, जिसमें नैनो आकार के छिद्र होते हैं, जो खून को जमाने में सहायक होते हैं। तीसरा, कैल्शियम परत, बहते हुए खून को जमाने में सहयोग करती है। चौथा, डेरिवेटिव्स ऑफ पॉलीसैकराइड्स, यह पूरी प्रक्रिया को एक दूसरे से जोड़ता है। प्लेटलेट्स को इक_ा करता है, खून को जमाता है, कोशिकाओं को सक्रिय करता है। इस टेप की बड़ी खूबी यह भी है कि अत्यधिक गर्मी और अत्यधिक सर्दी वाले स्थान पर भी यह उतना ही कारगर है।

कम लागत, और सस्ता होगा

प्राकृतिक पॉलीमर बेस्ड बैंडेज (टेप) खून में थक्का बनने की प्रक्रिया को बढ़ाकर कोशिकाओं को तेजी से भर देने का काम करता है। आइआइटी की लैब में तैयार 5 गुणा 8 यानी 40 वर्ग सेंटीमीटर के बैंडेज की उत्पादन लागत करीब 200 रुपये है। उत्पादन बढऩे पर इसकी कीमत काफी कम हो जाएगी। यह आम लोगों को भी किफायती दाम पर आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। आइआइटी कानपुर के बीएसबीई विभाग के प्रोफेसर अशोक कुमार ने बताया कि यह स्वदेशी और प्राकृतिक तकनीक पर आधारित है। इससे सड़क हादसों में घायल हुए लोगों की जान बचाई जा सकती है। एम्स में क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है। यह दुष्प्रभाव रहित भी है।

यह भी जानें

-अमेरिकी सेना हीमोस्टेटिक टेप का प्रयोग करती है।

-जापान सहित कई देशों में पॉलीमर बेस्ड हीमोस्टेटिक बैंडेज पर शोध अभी शुरुआती स्तर पर।

-ब्लड क्लाटिंग फैक्टर खोजे गए हैं लेकिन तेज गति के रक्तस्राव, अत्यधिक गर्मी और अत्यधिक सर्दी वाले स्थान पर वह कारगर नहीं।

-कई देशों ने खून जमाने वाली क्रीम भी बनाने की कोशिश, पर अधिक सफल नहीं।

-भारत में भी कुछ विश्वविद्यालय शोध कर रहे हैं, लेकिन क्लीनिकल ट्रायल के स्तर पर नहीं पहुंचे।

-आइआइटी बीएचयू ने जले कटे पर लगाने के लिए घुलने वाला बैंडेज तैयार किया है। इसका क्लीनिकल ट्रायल होना बाकी है।

Posted By: Abhishek

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस