कानपुर, जेएनएन। लोकसभा चुनाव में जीत के लिए भाजपा अपनी रणनीति के पत्ते एक बार फिर फेंटने जा रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र की दस लोकसभा सीटों के एक-एक विधानसभा क्षेत्र की गहनता से जानकारी ली है। अब कमजोर विधानसभाओं में पूरी ताकत झोंकने के लिए नए सिर से चुनावी अभियान की रूपरेखा तय की जा रही है।

2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान अमित शाह प्रदेश के प्रभारी थे। तब उन्होंने संगठन को निचले स्तर यानी बूथ स्तर तक परखा था। पहली दफा यहां बूथ अध्यक्षों से सीधा संवाद किया और रणनीति समझाई। परिणाम यह हुआ कि पार्टी दस में से नौ सीटें जीतने में कामयाब रही। लिहाजा, इस क्षेत्र को लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद भी अमित शाह काफी गंभीर हैं। बूथ अध्यक्षों का सम्मेलन पहले ही कर चुके हैं। बीते शनिवार को सभी लोकसभा क्षेत्रों के प्रभारी, संयोजक, जिलाध्यक्ष, संयोजकों के साथ बैठक की। प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल पहले ही होमवर्क करा चुके थे कि राष्ट्रीय अध्यक्ष की बैठक में क्या-क्या आंकड़े और जानकारियां लेकर आना है।

बैठक में मौजूद सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पहले तो लोकसभा सीट की स्थिति पर राय मांगी। सभी ने अपनी सीट को मजबूत बताया, जिस पर शाह मजबूती का आधार भी पूछते गए। इसके बाद उन्होंने प्रतिद्वंद्वी की मजबूती के बारे में भी पूछा और हर लोकसभा सीट पर विधानसभावार भी आंकड़ों सहित जानकारी ली। कहा कि यदि संगठन के किसी सहयोग, किसी कार्यक्रम की जरूरत हो तो वह भी बताते जाएं।

पार्टी पदाधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष पूरे आत्मविश्वास में थे। साथ ही विधानसभा क्षेत्रों की स्थिति जानने को गंभीर भी। अब शेष चुनावी अभियान उसी आधार पर तैयार किया जा रहा है। जहां भी जरा भी कमजोर महसूस होगी, उसी विधानसभा में वहां प्रभाव छोडऩे में सक्षम नेताओं की जनसभाएं कराई जाएंगी। इसके अलावा जातिगत समीकरणों के लिहाज से मोर्चों को और सक्रिय किया जाएगा। प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल ने विस्तारकों के साथ बैठक की। अमित शाह द्वारा बताई रणनीति के बारे में विस्तारकों को बताया।

Posted By: Abhishek

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