कानपुर, जेएनएन। चाचा....जल्दी अस्पताल आ जाओ सब कुछ खत्म हो गया। हाय! भगवान ये क्या हो गया। भाई तो दूल्हा बनने वाला था लेकिन सेहरे की जगह कफन में बांध दिया गया। अब घर वालों को क्या मुंह दिखाएंगे, क्या बताएंगे। लाल्हेपुर निवासी नीरज को रोते-बिलखते देख वहां खड़े हर व्यक्ति की आंख नम हो गई और सभी नियति को कोस रहे थे। नीरज ने हादसे में तीन छोटे भाइयों को खो दिया। सचेंडी में मंगलवार रात हुए बस-टेंपो की भिड़ंत में कई परिवारों की उजाड़ दिया। हादसे में एक गांव के एक परिवार के तीन सगे भाई और दूसरे परिवार के दो सगे भाइयों की मौत हो गई।

तीन भाइयों की लाशें कैसे ले जाएंगे घर

तीन जवान बेटों के शव स्ट्रेचर पर पड़े देखकर लाल्हेपुर के धनीराम छाती पीटते हुए ऊपर वाले को कोस रहे थे। नीरज ने बताया कि वह गांव में खेती करते हैैं और तीन भाई 24 साल के राममिलन, 22 साल के लवलेश और 18 साल का शिवभजन अंबा जी बिस्कुट फैक्ट्री किसान नगर में नौकरी करते थे। वह लोग अच्छे भले घर से निकले थे, थोड़ी देर बाद हादसे की खबर आ गई। उन्होंने बताया कि राममिलन की शादी बिनगवां में तय कर दी थी। नवंबर में विवाह समारोह होना था लेकिन भगवान ने भाई ही छीन लिया।

अब तीन भाइयों की लाश लेकर कैसे घर जाएंगे और क्या कहेंगे सबसे। इसी बीच उनके परिवार के कुछ लोग आ गए और उन्हें किनारे बैठाकर दिलासा देते रहे लेकिन वह बार-बार भाइयों को देखने की जिद कर रहे थे। परिवार में पिता धनीराम, मां गीता देवी, दो बड़े भाई अजय, नीरज और बहने उर्मिला निर्मला हैं। बड़े भाई अजय ने बताया कि रात की शिफ्ट थी। तीनों भाई एक साथ ही ड्यूटी आते जाते थे। शाम को 7.30 बजे वह घर से ड्यूटी जाने के लिए निकले थे।

त्रिभुवन के परिवार पर भी दुखों का पहाड़ टूटा

लाल्हेपुर गांव के त्रिभुवन के परिवार में पत्नी शारदा, तीन बेटे और बेटी अनुराधा है। तीन बेटों में बड़े धर्मराज और गौरव की हादसे में मौत हो गई। दोनों भाई बिस्कुट फैक्ट्री में काम करते थे। अब त्रिभुवन के बुढ़ापे का सहारा सिर्फ रावेंद्र ही बचा है। काल ने उनसे दो बेटे छीन लिए।

बेटे का शव देखकर बेसुध होकर गिरी

लाल्हेपुर के मृतक रजनीश के हादसे में घायल होने की जानकारी मिलने पर किसान अनंतराम पत्नी सरस्वती और दो छोटे बेटे मनीष और अनूप के साथ एलएलआर अस्पताल पहुंचे थे। जहां बेटे का शव देखकर सरस्वती बेसुध होकर गिर पड़ी। किसी तरह स्वजन ने पानी की छींटे आदि मारकर उन्हें होश में लाए। वह बार-बार यही कह रही थी कि रजनीश तुम हम लोगों को ऐसे छोड़कर नहीं जा सकते।

ऊपर वाले हमे उठा लेता बच्चों ने दुनिया ही कहां देखी थी

हादसे की जानकारी के बाद लाल्हेपुर गांव निवासी किसान लक्ष्मी प्रसाद भी पहुंचे थे। 20 वर्षीय बेटे सुभाष के शव से लिपट कर रो रहे थे। बार-बार यही कह रहे थे कि बेटे का बड़ा सहारा था। हे ऊपर वाले यही दिन देखने के लिए अब तक जिंदा रखा था क्या। उठाना था तो हमे उठा लेते। बच्चे ने तो अभी दुनिया भी नहीं देखी थी।

Edited By: Abhishek Agnihotri