जागरण संवाददाता, कानपुर : छोटी-छोटी बचत से एक अदद घर खरीद लेने का सपना हर कोई देखता है और खरीद लिया तो अपने घर में रहने का। लेकिन भारतीय स्टेट बैंक की कानपुर की विभिन्न शाखाओं से सरफेसी एक्ट में मकान खरीदने वालों के लिए यह सपना देखना सिरदर्द बन गया है। बैंक ने सरफेसी एक्ट की नीलामी में ऐसे मकान और भूखंड बेच दिये हैं जो उनके कब्जे में थे ही नहीं और आज वहां ऋण लेने वाले व्यक्ति से इतर कोई और रह रहा है। तीन दर्जन से अधिक खरीदार बैंक से खरीदे मकान पर कब्जा पाने के लिए चार साल से चक्कर लगा रहे हैं।

एसबीआइ चेयरमैन से की गई शिकायत के बाद चंडीगढ़ से जीएम स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में जांच टीम बुधवार को फूलबाग स्थित क्षेत्रीय मुख्यालय की तनावग्रस्त आस्ति समाधान शाखा (सार) पहुंची। इसकी भनक कुछ खरीदारों को लग गई। उन्होंने जांच टीम के सामने अपना पक्ष रखा और बैंक से पैसा मांगा। वहां रिकवरी एजेंट भी थे। उनकी खरीदारों से कहासुनी हो गई। खरीदारों ने स्थानीय बैंक अधिकारियों की मौजूदगी में रिकवरी एजेंटों पर अभद्रता का आरोप भी लगाया। क्या है सरफेसी एक्ट

आवास ऋण के लिए बैंक संबंधित भूखंड और आवास अपने पास बंधक रखते हैं। अदा न करने पर बैंक सरफेसी एक्ट के तहत संपत्ति कब्जे में लेकर नीलाम कर सकते हैं। नीलामी के बाद बैंक को हर हाल में कब्जा देना होता है। यह हैं मामले

- वर्ष 2014 में कर्रही निवासी एसपी सिंह के बेटे शिवओम सिंह और अविजीत त्रिपाठी ने 100-100 गज का प्लाट हाउस नंबर 257 सनिगवां में एसबीआइ से ई नीलामी में खरीदा। यहां ऋण धारक काबिज नहीं है और 2003 की रजिस्ट्री के साथ रानी रघुवंशी काबिज हैं। बैंक ने रिकार्ड में प्लाट बेचा है जबकि इस जमीन पर मकान बना हुआ है। - पारस प्रसाद ने 2015 में ई नीलामी से अराजी संख्या 208 मिर्जापुर में प्लाट खरीदा। यहां भी दूसरा काबिज है। - गंगागंज पनकी निवासी पदमाकर दुबे ने आवास विकास योजना-1 पनकी रोड कल्यानपुर स्थित मकान नंबर जी 1100 ई नीलामी में खरीदा। यहां भी किसी और का कब्जा है। - जूही निवासी सुरजीत सिंह ने मई 2015 में सतबरी में अराजी संख्या 307, प्रापर्टी नंबर 8, प्लाट नंबर 10ए खरीदा। यहां भी कोई और काबिज है। जांच टीम आई है। उन्होंने जो दस्तावेज मांगे, उपलब्ध करा दिए गए। जांच टीम क्यों आई है या लोगों ने हंगामा किया इसकी जानकारी नहीं है।

- अरविंद जायसवाल, सहायक महाप्रबंधक, सार

By Jagran