उरई, जेएनएन। UP Police News वारंट चूंकि जारी हो चुका था, गिरफ्तारी कर पेश करने का अदालती आदेश था तो 'कर्तव्य परायण' पुलिस वांछित श्रीमान की जगह श्रीमती को पकड़कर पेश कर दिया। पुलिस की इस हरकत को देख मजिस्ट्रेट ने न केवल डांटा फटकारा बल्कि जांच के भी आदेश दिए। कोतवाली पुलिस की कार्यशैली इन दिनों सुर्खियों में है। अभिरक्षा में जहां हत्या का आरोपित हाथ की नस काटकर आत्महत्या का प्रयास कर लेता है और पुलिस देखती रह जाती है तो कभी पुलिस ग्राम पंचायत के चुनाव में बार संघ के अध्यक्ष और कई वृद्ध अधिवक्ताओं को नगर के निवासी होने पर भी शांतिभंग में पाबंद कर देती है। इस बार तो पुलिस ने नया कारनामा करके अदालत तक को अचंभित कर दिया है। घटना नगर के मोहल्ला गांधी नगर की है।

ये है पूरा मामला: परिवाद संख्या 68/2016 सिविल जज जूनियर डिवीजन की अदालत में इंद्रजीत चतुर्वेदी बनाम आयशा नाम से विचाराधीन है। मुकदमे में आयशा समेत चार आरोपित हैं जिनमें तीन की जमानत कोर्ट से हो चुकी है। चौथे आरोपित आयशा के पति कस्सू के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट ने वारंट जारी किया था। कोतवाली पुलिस के उपनिरीक्षक मदन पाल वारंटी को गिरफ्तार करने उसके घर पहुंचे तो कस्सू नहीं मिला। पुलिस पत्नी आयशा को गिरफ्तार कर ले आई, जबकि वह जमानत पा चुकी है। उसका बाकायदा चिकित्सीय परीक्षण कराया। छह अप्रैल को उसे न्यायिक मजिस्ट्रेट पलास गांगुली की अदालत में पेश कर दिया। जब मजिस्ट्रेट ने फाइल देखी तो पता चला कि आयशा का कोई वारंट जारी ही नहीं हुआ था। वारंट तो उसके पति कस्सू का था। पुलिस की इस लापरवाही को देखते हुए मजिस्ट्रेट ने गिरफ्तार महिला को तुरंत रिहा करने के आदेश दिए। साथ ही उपनिरीक्षक को कड़ी फटकार लगाई। मजिस्ट्रेट ने सीओ को जांच कर आख्या देने का आदेश भी कर दिया। महिला का मुकदमा लड़ रहे अधिवक्ता हलीम ने बताया कि महिला का कोई वारंट अदालत से जारी नहीं हुआ था। पुलिस ने फिर भी गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर दिया। अब मुकदमे की अगली तारीख 21 जून लगा दी गई है।

इनका ये है कहना: सीओ राहुल पांडेय का कहना है कि घटना की जांच की जा रही है। कहां और किससे गलती हुई है, इसका पता लगाकर कार्रवाई की जाएगी।

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