UGC के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले PCS अलंकार अग्निहोत्री की कानपुर में स्वागत की तैयारी, परिवार उनके फैसले के साथ
अलंकार अग्निहोत्री (alankar agnihotri ) ने यूजीसी (UGC) बदलावों और प्रयागराज घटना के विरोध में पीसीएस पद से इस्तीफा दिया। ...और पढ़ें

HighLights
पिता के निधन के बाद मां ने पाला, अब यूजीसी में बदलाव के खिलाफ नौकरी छोड़ी
परिवार उनके जनहितैषी फैसले का पूर्ण समर्थन कर रहा है
जागरण संवाददाता, कानपुर। Alankar Agnihotri: कानपुर के रहने वाले 2019 बैच के पीसीएस बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अधिकारी अग्निहोत्री ने इस्तीफा देकर सरकार पर कई मुद्दों में अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने यूजीसी में बदलाव और प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई घटना के विरोध में इस्तीफा दिया। वहीं, अब वह कानपुर आ सकते हैं। ऐसे में परिवार भी उनके समर्थन में आ गया है। उनके चचेरे भाई ने कहा कि भाई ने जो फैसला लिया, परिवार उनके साथ खड़ा है। वहीं, अलंकार अग्निहोत्री ने बरेली में अपना सरकारी आवास खाली कर दिया है। उन्होंने सामान भरा मिनी ट्रक कानपुर स्थित घर भेजा है।
यूजीसी में बदलाव व प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई घटना के विरोध में नौकरी छोड़ने वाले पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री का जीवन बेहद कठिन रहा है। पिता के निधन के बाद मां ने बैंक में नौकरी करके चार बेटों व एक बेटी को पालापोशा। यही वजह रही कि अलंकार ने भी पहले भाई-बहनों को पैरों पर खड़ा किया, उसके बाद खुद भी पहले ही प्रयास में पीसीएस की परीक्षा पास की। नियुक्ति के छह साल बाद ही नौकरी छोड़ने के बाद विशेषकर मां गहरे सदमे में चली गई हैं, मगर परिवार उनके परिवार के साथ खड़ा है।
बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट रहे अलंकार अग्निहोत्री इस्तीफा देकर इन दिनों चर्चा में हैं। वह मूल रूप से कानपुर के रहने वाले हैं। परिवार केशवनगर के डब्ल्यू ब्लाक में रहता है। चचेरे भाई राजेश अग्निहोत्री ने बताया कि अलंकार के पिता विजय कुमार का निधन वर्ष 1986 में हो गया था। वह अपने पीछे चार बेटे अलंकार, राहुल, शशांक, अंकित के अलावा एक बेटी दीपिका व पत्नी गीता को छोड़ गए थे।
विजय कुमार बैंक में थे और उनके निधन के बाद गीता देवी को बैंक में क्लर्क की नौकरी मिली। अलंकार भाई-बहन में सबसे बड़े थे। इसीलिए उन्होंने अपने करियर के स्थान पर छोटे भाईयों व बहन पर ज्यादा ध्यान दिया। 12वीं की परीक्षा 1998 में पास की और प्रदेश में 21वां स्थान मिला। खुद भी आइआइटी बीएचयू से मेटल इंजीनयिरिंग में बीटेक किया और बहन व भाईयों को भी इंजीनियर बनाया। इस दौरान बीटेक करने के बाद परिवार को आर्थिक सहयोग करने के लिए उन्होंने प्राइवेट नौकरी की। आइटी सेक्टर में कंसल्टेंट की नौकरी भी की।
बहन व भाई के पैरों पर खड़ा होने के बाद अलंकार ने यूपीएससी की परीक्षा दी और पहली ही परीक्षा में वर्ष 2019 में पास हुए और 15वीं रैंक हासिल की। वह अब तक लखनऊ, उन्नाव व बलरामपुर में एसडीएम के पद पर रह चुके हैं। यूजीसी में वह बदलाव के विरोध में उनके द्वारा उठाए गए इस कदम पर उनका परिवार भी उनके साथ है। चचेरे भाई राजेश अग्निहोत्री ने बताया कि उनके भाई ने जो भी फैसला लिया है वह बहुत सोच समझ के लिया है। वह कहीं ना कहीं युवाओं के जनहित में उठाया गया फैसला है।
