कानपुर, जेएनएन। बीटेक की पढ़ाई के दौरान ही छात्रों को कंपनियों में काम करने अनुभव भी मिलेगा। डिग्री लेने के बाद वह किसी भी कंपनी में बिना प्रशिक्षण के काम कर सकेंगे। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद 'एआइसीटीई' ने इस वर्ष से छात्रों के लिए छह माह की औद्योगिकी प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया है। कानपुर समेत प्रदेश में संचालित सभी 400 इंजीनियरिंग कॉलेजों में अध्ययनरत छात्रों को इसी वर्ष से इसका लाभ मिलने लगेगा।

अभी तक बीटेक छात्र चार साल के कोर्स में दो माह की इंटर्नशिप करते हैं। एआइसीटीई ने अपने अध्ययन में पाया कि बीटेक करने के बाद कॉलेजों से निकलने वाले कई छात्रों को नौकरी नहीं मिल पा रही है। इसका कारण कंपनियों में बदलते काम के तरीके व आधुनिक सॉफ्टवेयर हैं। इस संबंध में एआइसीटीई ने विषय विशेषज्ञ व वरिष्ठ प्रोफेसरों से सुझाव मांगे। उनके सुझाव के आधार पर एआइसीटीई ने सभी तकनीकी कॉलेजों को यह निर्देश जारी कर दिए कि छात्रों के लिए छह माह की औद्योगिक प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाए जिससे उन्हें कोर्स खत्म होने के बाद कंपनियों में काम सीखने के लिए अपना समय न नष्ट करना पड़े। इसके अलावा उन्हें उन सॉफ्टवेयर के बारे में भी जानकारी मिल सके जो आधुनिकता के दौर में कंपनियों में इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

प्लेसमेंट सेल करेंगे काम

कंपनियों से संपर्क करके छात्रों को औद्योगिक प्रशिक्षण दिलाने की जिम्मेदारी तकनीकी कॉलेज के प्लेसमेंट सेल को दी गई है। बीटेक द्वितीय वर्ष से छात्र कंपनियों में प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। उत्तर प्रदेश वस्त्र एवं प्रौद्योगिक संस्थान 'यूपीटीटीआइ' के निदेशक प्रोफेसर मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि इससे छात्रों के प्लेसमेंट का ग्राफ बढेगा। पहली बार बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्रों के साथ इसकी शुरुआत होगी। छात्र एक साथ कम से कम दो माह तक प्रशिक्षण के लिए कंपनियों में जा सकेंगे।

-बीटेक के बाद छात्रों को नौकरी के लिए इधर-उधर न भटकना पड़े इसलिए कंपनियों में उनके प्रशिक्षण की अवधि बढ़ाने के साथ कोर्स में भी प्रयोगात्मक अध्ययन का अनुपात बढाया गया है। कॉलेजों की पढ़ाई व उद्योग की जरूरत के बीच जो खाई है उसे इससे पाटा जा सकेगा। -डॉ मनोज तिवारी, क्षेत्रीय अधिकारी एआइसीटीई

Posted By: Abhishek

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