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मुंह के कैंसर से लड़ने के लिए AI का नया प्रयोग, 9 से अधिक राज्यों में 40,000 से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग

Published: Sun, 13 Sep 2026 06:05 PM (IST)

एआई मॉडल 'आरोग्य आरोहण' ऐप मुंह के कैंसर के शुरुआती लक्षणों की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिससे ...और पढ़ें

एम्स दिल्ली की ओरल पैथालाजिस्ट डा. दीपिका मिश्रा।

एम्स दिल्ली की ओरल पैथालाजिस्ट डा. दीपिका मिश्रा।

HighLights

  1. एआई मॉडल 'आरोग्य आरोहण' ऐप से कैंसर पहचान

  2. 9+ राज्यों में 40,000 से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग

  3. तंबाकू मुक्ति हेतु 'आरोग्य संकल्प' चैटबॉट सहायक

जागरण संवाददाता, कानपुर। मुंह का कैंसर एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। समय पर जांच और जागरूकता के अभाव में अधिकांश मरीज तीसरी या चौथी स्टेज में अस्पताल पहुंचते हैं, जिससे उनके बचने की संभावना पांच से 25 प्रतिशत तक ही रह जाती है लेकिन अब इसमें एआई माडल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। स्वास्थ्य केंद्र कर्मियों की मदद से जांच प्रक्रिया तेज हुई है। सीएसजेएमयू में आयोजित एआई मंथन में एम्स दिल्ली की ओरल पैथालाजिस्ट डा. दीपिका मिश्रा ने यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि एआई माडल से आरोग्य आरोहण एप बनाया गया है जो स्वास्थ्य कर्मियों और आशा कार्यकर्ताओं द्वारा प्रयोग में लाया जा रहा है। यह साधारण स्मार्टफोन की मदद से मुंह के अंदर की फोटो खींचकर कैंसर के शुरुआती (प्री-कैंसर) लक्षणों की पहचान करने में मददगार है। अब तक नौ से अधिक राज्यों में 40,000 से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के 48 से अधिक गांवों में सफल परीक्षण किया गया है। इसके साथ ही आरोग्य संकल्प एप (तंबाकू मुक्ति चैटबाट) की सहायता से तंबाकू और पान-मसाले की लत छुड़ाने के लिए काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि रिसर्च में देखा गया है कि महिलाओं में तंबाकू सेवन से कैंसर का खतरा पुरुषों के मुकाबले अधिक है। इसके अलावा जब तंबाकू के साथ शराब या किसी ड्रिंक का सेवन किया जाता है तो कैंसर का खतरा कई गुणा बढ़ जाता है।

मल्टी-मोडैलिटी तकनीक

एम्स और आईआईटी दिल्ली जैसी संस्थाएं ऑप्टिकल स्पेक्ट्रोस्कोपी और इमेजिंग जैसी 5-6 अलग-अलग तकनीकों को मिलाकर डिवाइस की सटीकता को और बेहतर बना रही हैं।

निकोटिन और एडिक्शन की चुनौती

देश में तंबाकू और पान-मसाले के अत्यधिक सेवन का मुख्य कारण इसमें मौजूद निकोटिन है। निकोटिन मस्तिष्क के रिसेप्टर्स को प्रभावित कर न्यूरोलॉजिकल निर्भरता पैदा करता है, जिससे व्यक्ति को बार-बार इसकी तलब महसूस होती है। एआइ टूल्स के जरिए शुरुआती रोकथाम और काउंसलिंग से इस चक्र को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।