CSJMU में आज से शुरू होगा AI मंथन 2.0, AIIMS और IIT के विशेषज्ञ करेंगे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर चर्चा
सीएसजेएमयू कानपुर में आज से दो दिवसीय 'एआई मंथन 2.0' शुरू हो रहा है, जिसमें देशभर के विशेषज्ञ कृत्रिम बुद्धिमत्ता के वर्तमान और भविष्य पर चर्चा करेंगे।

HighLights
सीएसजेएमयू में दो दिवसीय एआई मंथन 2.0 का आयोजन।
शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और प्रशासन में एआई पर चर्चा।
देशभर के विशेषज्ञ कृत्रिम बुद्धिमत्ता के भविष्य पर विचार-विमर्श करेंगे।
जागरण संवाददाता, कानपुर। कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब सिर्फ मोबाइल और बातचीत करने वाले साधनों तक सीमित नहीं है। पढ़ाई से लेकर अस्पताल, खेत, सरकारी दफ्तर और उद्योग तक इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसी बदलती तस्वीर पर आज से छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में देशभर के विशेषज्ञ आज जुटें है।
विश्वविद्यालय में 12 और 13 सितंबर को एआई मंथन 2.0 का आयोजन हो रहा है। दो दिन चलने वाले इस आयोजन में करीब 40 राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपति, आईआईटी, एम्स, कैंसर संस्थानों, प्रशासन और तकनीकी उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ कृत्रिम बुद्धिमत्ता के वर्तमान और भविष्य पर मंथन करेंगे।

शिक्षा और कौशल से शुरू होगी चर्चा
आईआईटी खड़गपुर के प्रो. पार्थ प्रतिम चक्रवर्ती कृत्रिम बुद्धिमत्ता से शिक्षा, शोध और तकनीकी विकास में हो रहे बदलाव पर व्याख्यान देंगे। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमृत त्रिपाठी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में विद्यार्थियों के लिए जरूरी नए कौशल और बदलती शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा करेंगे।
प्रदेश के अपर मुख्य सचिव, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के आलोक कुमार उत्तर प्रदेश को कृत्रिम बुद्धिमत्ता से सक्षम बनाने, सार्वजनिक सेवाओं और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर करने की संभावनाओं पर विचार रखेंगे।
विकसित भारत में विश्वविद्यालयों की भूमिका
वहीं एआई मंथन बीआईटीएस पिलानी के कुलपति प्रो. वी. रामगोपाल राव कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में विश्वविद्यालयों की बदलती भूमिका पर चर्चा करेंगे। शोध, नवाचार, कौशल विकास और उद्योग तथा शिक्षा संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करने पर भी मंथन होगा।
आईआईटी मंडी के डॉ. अमित शुक्ला शोध पत्रों से लेकर खेतों में काम करने वाले रोबोट तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक को पहुंचाने की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। ड्रोन, कंप्यूटर दृष्टि, स्वचालित प्रणालियों और रोबोटिक्स में इसके इस्तेमाल पर भी बात होगी।

बीमारी की पहचान से इलाज तक पहुंचेगी तकनीक
स्वास्थ्य क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल पर विशेष चर्चा होगी. एम्स नई दिल्ली की प्रो. कृतिका रंगराजन स्तन कैंसर की पहचान, विश्लेषण और उपचार में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर बात करेंगी। राजीव गांधी कैंसर संस्थान, नई दिल्ली के डॉ. वसंत वेणुगोपाल रेडियोलॉजी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल और चिकित्सा क्षेत्र के भविष्य पर अपने अनुभव साझा करेंगे।
चिकित्सकीय जांच, चिकित्सकीय चित्रों के विश्लेषण और इलाज से जुड़े निर्णय लेने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका पर भी विशेषज्ञ चर्चा करेंगे।
खेत के आंकड़ों से तैयार होंगे कृत्रिम बुद्धिमत्ता के मॉडल
कृषि क्षेत्र में भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता की संभावनाओं पर चर्चा होगी. आईआईटी रोपड़ के डॉ. मुकेश सैनी फसल और कृषि संबंधी आंकड़ों के विश्लेषण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मॉडल तैयार करने की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। कृषि अनुसंधान और खेती से जुड़ी समस्याओं के समाधान में तकनीक के इस्तेमाल पर भी विचार होगा।
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गूगल और आईबीएम बताएंगे उद्योग की दिशा
तकनीकी उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ भी आयोजन में शामिल होंगे। गूगल के सौरभ राजपाल उच्च शिक्षा में तकनीक के इस्तेमाल और विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। आईबीएम सॉफ्टवेयर लैब इंडिया के विशाल चहल सुरक्षित और आत्मनिर्भर तकनीकी व्यवस्था, आंकड़ों की सुरक्षा और जिम्मेदार कृत्रिम बुद्धिमत्ता अपनाने की जरूरत पर विचार रखेंगे।
सिर्फ भाषण नहीं, तकनीकी समाधान भी दिखेंगे
आयोजन में विशेषज्ञों के व्याख्यान के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उत्पादों और तकनीकी समाधानों का प्रदर्शन भी होगा। विद्यार्थियों के शैक्षणिक अभिलेखों के सत्यापन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणाली प्रस्तुत की जाएगी। सुरक्षित और व्यक्तिगत शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल पर भी चर्चा होगी।
दो दिन चलने वाले इस आयोजन में सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्या कर सकती है, बल्कि यह भी होगा कि इस तकनीक के जरिए भारत की शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, शासन और रोजगार व्यवस्था को किस तरह बेहतर बनाया जा सकता है।
