कानपुर, जेएनएन। हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी के हत्यारे गुजरात से कानपुर तक उद्योगकर्मी एक्सप्रेस से आए और गुजरात की अपनी आइडी से कानुपर में सिम और फोन खरीदा। इसके बाद यहां से सड़क मार्ग से लखनऊ गए थे। इसी सिम से कमलेश को फोन भी किया गया था, इसकी जानकारी के बाद एसटीएफ लखनऊ की टीम ने कानपुर सेंट्रल स्टेशन आकर सीसीटीवी फुटेज खंगाले।

पुलिस ने कमलेश के मोबाइल फोन पर आई अंतिम कॉल का ब्योरा निकाला। इसके बाद एक-एक कर 40 मोबाइल नंबरों का ब्योरा खंगाला गया। हत्यारों की पहचान को 25 सीसी कैमरों की फुटेज देखी गईं। पुलिस को हत्यारों की तस्वीरें मिलना शुरू हुईं, उसी बीच सर्विलांस के जरिये सुराग भी लगने लगे।

आशंका है कि कानपुर के किसी शख्स ने हत्यारों को लखनऊ तक जाने में मदद की। कानपुर में लिए गए सिम की जानकारी मिलते ही पुलिस की पूरी पड़ताल एक दिशा में टिक गई। गुजरात कनेक्शन की कडिय़ां खंगाली जाने लगीं। खरीदे गए सिम से सूरत में कई लोगों से बात भी की। शनिवार शाम करीब चार बजे एसटीएफ लखनऊ की टीम कानपुर यूनिट के साथ अचानक स्टेशन पहुंची और प्लेटफार्म एक स्थित कंट्रोल रूम में जाकर आरपीएफ की मदद से परिसर व आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाली। आरपीएफ इंस्पेक्टर पीके ओझा ने बताया कि एसटीएफ की टीम शाम को स्टेशन आई थी। टीम ने कंट्रोल रूम में परिसर और बाहर के कैमरों की फुटेज भी देखी है। इसके अलावा कई कैमरों की फुटेज कब्जे में ली है।

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