कानपुर,जेएनएन। भारत रत्न राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख का ध्येय था कि गांव का विकास जनता की पहल व सहभागिता से ही किया जा सकता है। उसके लिए उन्होंने चित्रकूट परिक्षेत्र में यूपी व एमपी के करीब पांच सौ गांव चुने थे और वहां पर सहभागिता के विकास की कहानी लिखी। आज नानाजी हमारे बीच नहीं हैं लेकिन सहभागिता का मंत्र लोग नहीं भूले हैं। उनकी पुण्यतिथि पर होने वाले कार्यक्रम व भंडारा में एक मुट्ठी अनाज व एक रुपये का अंशदान करते हैं।दस वर्षो से इसी अंशदान से भारत रत्न नानाजी की पुण्यतिथि पर आयोजन हो रहा है।

27 फरवरी को याद नानाजी की पुण्यतिथि

नानाजी की 11 वीं पुण्यतिथि पर 27 फरवरी को दीनदयाल शोघ संस्थान उद्यमिता विद्यापीठ में कार्यक्रम होगा। जिसमें ग्रामीणों को कृषि, पशुपालन, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वरोजगार, विवाद मुक्त ग्राम और अन्य क्षेत्रों की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। साथ ही विशाल भंडारा होगा। इसके लिए प्रत्येक घर से कम से कम एक मुट्ठी अनाज और कम से कम एक रुपये का अंशदान सहयोग रूप में लिया जा रहा है।

नानाजी स्थूल रूप में गए पर आस्था में विद्यमान

दीनदयाल शोघ संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन कहते है कि व्यक्ति पुरुषार्थी, स्वावलंबी तब बनता है जब उसका आत्मबल मजबूत होता है। आत्मविश्वास को मजबूती देने में आस्था का होना जरूरी है। ऐसी ही कुछ आस्था चित्रकूट क्षेत्र के ग्राम वासियों में भारत रत्न नानाजी देशमुख के लिए दिखी। पुण्यतिथि कार्यक्रम के भले ही चार-पांच दिन शेष है लेकिन जन सहभागिता का भाव गांव-गांव दिखाई दे रहा है। नानाजी स्थूल रूप से गए लेकिन उनके प्रति आस्था आज भी विद्यमान है।

टोलियां गांव-गांव दे रही आमंत्रण

नानाजी ने एमपी के मझगवां विकासखंड और यूपी के चित्रकूट जनपद के पांच सौ गांवों को विवाद मुक्त और स्वावलंबी बनाया था। उन गांव में टोली के रूप में लोग सभी घरों तक पहुंच रहे हैं और पुण्यतिथि कार्यक्रम का आमंत्रण दे रहे हैं।  

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