समीर दीक्षित, कानपुर : बेसिक शिक्षा विभाग में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जिन बच्चों का नाम प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में दर्ज था वे बच्चे वहां न पढ़कर पास के निजी स्कूलों में पढ़ रहे थे। ऐसे बच्चों की संख्या करीब 48,000 है। ऑनलाइन डाटा तैयार करते समय यह बात सामने आई है। पाया गया कि ये बच्चे 80 निजी स्कूलों में पढ़ रहे थे। जबकि इनमें से तमाम विद्यालय अमान्य श्रेणी के हैं।

विभाग की ओर से तैयार हुए डाटा में वर्ष 2016-17 में कक्षा एक से आठवीं तक कुल छात्र-छात्राओं की संख्या 7.48 लाख सामने आई थी। इसके बाद जब ये आकड़े दोबारा तैयार कराए गए तो उनकी संख्या घटकर सात लाख रह गई। अचानक 48 हजार बच्चों का रिकॉर्ड न मिलने से अफसरों और कर्मियों को शक हुआ। इसके बाद जाच कराई गई और मामला पकड़ में आया। कार्यालय के सूत्रों के अनुसार मुताबिक यह फर्जीवाड़ा आधार नंबर फीड कराने के दौरान पकड़ में आया। इस संख्या की मदद से उन बच्चों का डाटा सामने आया जो वास्तविक रूप से पंजीकृत थे। विभाग से संबद्ध स्कूलों को डाटा कैप्चर फार्मेट में बच्चों से संबंधित सभी जानकारियां देनी होती हैं। कई स्कूलों ने खेल करने के चक्कर में गलत जानकारिया लिखकर भेजीं। इसी पर शक हुआ और फिर जांच पड़ताल में गड़बड़ी पकड़ में सामने आई। सितंबर 2018 तक जो आकड़े तैयार होंगे, उनकी पहले जाच करा ली जाएगी। किसी तरह का फर्जीवाड़ा नहीं होने दिया जाएगा। अगर स्कूल ऐसा कर रहे हैं तो उन्हें सचेत होने की जरूरत है।

प्रवीणमणि त्रिपाठी, बीएसए

Posted By: Jagran

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