कानपुर, जेएनएन। चकेरी में सेना और एफसीआइ (फूड कार्पोंरेशन आफ इंडिया) विभाग में सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर बीएसएनएल के सेवानिवृत्त एजीएम, सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी समेत अन्य लोगों से 43.5 लाख रूपये की ठगी की। अपने साथ हुई ठगी का एहसास होने पर पीडि़तों ने रकम वापस मांगी तो आरोपितों ने जान से मारने की धमकी दी। घटना के बाद पीडि़तों ने मामले की शिकायत पुलिस कमिश्नर असीम अरुण से की। साथ ही यह जानकारी दी कि आरोपितों ने उनकी जान पहचान के 10 से 12 लोगों से करीब एक करोड़ रूपये की धोखाधड़ी की है। जिसके बाद पुलिस कमिश्नर के आदेश पर चकेरी पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया।

चकेरी के भवानी नगर निवासी चंद्रमा प्रसाद सिंह बीएसएनएल से एजीएम के पद से सेवानिवृत्त है। उन्होंने बताया कि 2018 में उनके दामाद प्रवीन की मुलाकात मूलरूप से बिहार निवासी विनोद कुमार से हुई। जो चकेरी के सतबरी रोड में रहता था। दोस्ती बढऩे पर विनोद ने दामाद से बोला कि उनका मित्र रितेश सिंह एक केंद्रीय मंत्री का पर्सनल अस्सिटेंट है। जिसके जरिए वह मंत्री कोटे से सेना और एफसीआई में नौकरी लगवा सकते है। जिसके लिए उन्हें आठ लाख रूपये देने होगे। जिसकी बातों में आकर दामाद ने उन्हें और अपने पिता सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी रमेश चंद्र यादव को दी। जिसके बाद उन्होंने अपनी दोनों बेटियों और भांजे की एफसीआई में नौकरी लगवाने के लिए कई बार में उसे करीब 24 लाख रूपये दिए। वहीं दामाद के पिता ने बेटे और भतीजे की एफसीआई में नौकरी के लिए करीब 15 लाख रूपये दिए। वहीं दामाद के दोस्त दहेली सुजानपुर निवासी प्रदीप कुमार ने सेना में एमईएस के पद पर नौकरी लगवाने के नाम पर 4.5 लाख रूपये दे दिए। जिसके बाद आरोपितों ने उन्हें ज्वाइङ्क्षनग लेटर दे दिया। जब वह लोग नौकरी पर ज्वाइङ्क्षनग करने पहुंचे तो उन्हें अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ। जिसके बाद उन लोगों ने आरोपितों से अपनी रकम वापस मांगी तो वह जान से मारने की धमकी देने लगे। थाना प्रभारी मधुर मिश्रा ने बताया कि आरोपितों पर रिपोर्ट दर्जकर मामले की जांच की जा रही है। 

इंटरव्यू, ज्वाइनिंग लेटर और ट्रेनिंग कराकर दिलाया भरोसा: पीड़ितों ने बताया कि आरोपितों ने उन सभी को दिल्ली बुलाकर इंटरव्यू करवाया। जिससे आरोपितों ने उन्हें भरोसे में लिया। जिसके बाद आरोपितों ने इंटरव्यू के नाम पर कुछ रकम ली। जिसके बाद आरोपितों ने ज्वाइनिंग लेटर देकर कुछ रकम ली। ज्वाइङ्क्षनग लेटर मिलने पर उन्हें आरोपितों पर भरोसा हो गया। जिसके बाद आरोपितों ने उन सभी की कुछ दिन झांसी में ट्रेनिंग भी करवाई। इस तरह से आरोपितों ने उन्हें भरोसे में लिया और वह लोग उनके झांसे में आ गए। 

Edited By: Shaswat Gupta