कानपुर, जेएनएन। बिकरू कांड की जांच करने वाली एसआइटी की संस्तुति पर जिन 23 पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच शुरू की गई थी, उनके बयान हो चुके हैं। पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति होने के बाद आगे दंड देने की कार्रवाई होगी। इसमें एक माह का वक्त और लग सकता है।

बिकरू कांड की जांच के लिए शासन की ओर से गठित की गई एसआइटी ने 23 पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्रारंभिक जांच की संस्तुति की थी। डीआइजी की ओर से यह जांच एसपी पूर्वी को सौंपी गई थी। उन्होंने आरोपित पुलिसकर्मियों को बुला आरोपों के बाबत बयान लिए। सूत्रों के मुताबिक आरोपितों ने खुद को बेकसूर बताते हुए कहा कि उन पर लगे आरोप बेबुनियाद हैं। किसी ने भी विकास दुबे से अपने संबंधों को स्वीकार नहीं किया। विकास दुबे के शस्त्र लाइसेंस बन जाने के सवाल पर आरोपितों ने डीसीआरबी (जिला क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो) के तत्कालीन प्रभारी को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में विकास के खिलाफ कोई भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ था। अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद अब विभागीय कार्रवाई के लिए पीठासीन अधिकारी की तैनाती की जाएगी। इसमें फिर आरोपित अपना पक्ष रखेंगे। अगर उनके खिलाफ दंड की संस्तुति की जाती है तो आरोपित उच्चाधिकारियों से भी अपील कर सकते हैं। 

 

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