कानपुर, जेएनएन। कृषि बिलों के अमल पर सुप्रीम कोर्ट की रोक लगाने के बाद मंडियों में पांच जून 2020 से पहले की स्थिति हो जाएगी। मंडी शुल्क बचाने के लिए मंडी के बाहर कारोबार करने वाले कारोबारियों को फिर मंडी के अंदर कारोबार करने वाले वाले आढ़तियों व कारोबारियों की तरह मंडी शुल्क देना होगा। हालांकि इसके लिए मंडियों को शासनादेश की जरूरत होगी। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से रोक लगाए जाने के बाद मंडी से जुड़े आढ़तिए और कारोबारी इस बात को लेकर परेशान हैं कि अब उन्हें जो मंडी के बाहर कारोबार पर मंडी शुल्क की छूट मिली हुई थी वह जारी रहेगी या नहीं।

टिंबर काराेबारी का रोका गया माल 

दूसरी ओर कानपुर के एक टिंबर कारोबारी गुरुजिंदर सिंह का मंगलवार शाम को मध्य प्रदेश के कटनी में माल रोक लिया गया। उन्हें बताया गया कि मंडी के कागजात नहीं हैं। इस पर टिंबर कारोबारी ने भी कटनी के मंडी कर्मियों को बताया कि अभी सुप्रीम कोर्ट का आदेश हुआ है, लिखापढ़ी में कोई आदेश नहीं आया है, इसलिए माल को वह रोक नहीं सकते। कारोबारियों के मुताबिक अब इस तरह से कारोबारियों को परेशान करना भी शुरू हो जाएगा। जब तक कोई स्पष्ट आदेश नहीं आ जाए तब तक इस तरह से मंडी शुल्क को लेकर वाहन नहीं रोकने चाहिए।

इनका ये है कहना 

इस संबंध में मंडी सचिव सुभाष सिंह का कहना है कि कृषि बिल पर रोक लगने के बाद अब पांच जून 2020 से पहले की स्थिति हो गई है। उस स्थिति में मंडी के अंदर या मंडी के बाहर कहीं भी कारोबार करने पर उन सभी वस्तुओं पर शुल्क लग रहा था जो मंडी से जुड़े कारोबार में शामिल हैं। इन सभी से शुल्क लिया जा सकता है लेकिन इसके लिए शासन से जब आदेश आ जाएगा, उसके मुताबिक ही आगे कार्य किया जाएगा।

 

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