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Chitrakoot JE Case: अधिवक्ताओं के मुताबिक यदि आरोप सिद्ध हुए तो ताउम्र जेल में रहेगा अवर अभियंता

Chitrakoot JE Case जेई के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत लगी हैं संगीन धाराएं। सीबीआइ जुटा चुकी साक्ष्य और भी कर रही तलाश। बच्चों को सेक्सुअल एक्ट में शामिल करना या नग्न वीडियो दिखाना इंटरनेट पर नग्न तस्वीरों व वीडियो को अपलोड करना भी पॉक्सो एक्ट के तहत आता है।

By ShaswatgEdited By: Published: Wed, 18 Nov 2020 07:02 PM (IST)Updated: Wed, 18 Nov 2020 07:02 PM (IST)
Chitrakoot JE Case: अधिवक्ताओं के मुताबिक यदि आरोप सिद्ध हुए तो ताउम्र जेल में रहेगा अवर अभियंता
अधिवक्ता अवधेश प्रसाद विश्वकर्मा और बद्री विशाल ङ्क्षसह की फाइल फोटो।

कानपुर, जेएनएन। बच्चों के यौन उत्पीडऩ जैसे संगीन आरोपों से घिरे ङ्क्षसचाई विभाग के अवर अभियंता रामभवन पर लगे आरोप सिद्ध हुए तो उसे 10 वर्ष से आजीवन कारावास तक की सजा भुगतनी होगी। कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, रामभवन पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं। इसमें अर्थदंड के साथ ही आजीवन कारावास की सजा तय है।  

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पॉक्सो एक्ट की धारा 14 के तहत पांच से सात साल की सजा का प्रावधान 

जिले के वरिष्ठ अधिवक्ता बद्री विशाल सिंह कहते हैं कि पॉक्सो की धारा 14 में आरोपित को उम्र कैद और धारा 377 में दस वर्ष से आजीवन कारावास व आइटी एक्ट 67-बी में अर्थदंड के साथ पांच से सात साल तक की सजा का प्रावधान है। आइटी एक्ट 67-बी में बच्चों को सेक्सुअल एक्ट में शामिल करना या नग्न वीडियो दिखाना, इंटरनेट पर नग्न तस्वीरों व वीडियो को अपलोड करना और उसे दूसरों को भेजना भी इसी कानून के तहत आता है। 

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बहुत संगीन है पॉक्सो एक्ट की धारा 14 लगना 

वरिष्ठ अधिवक्ता अवधेश प्रसाद विश्वकर्मा कहते हैं कि ऐसे मामले बहुत ही संगीन होते हैं। अगर अवर अभियंता पर लगे आरोप सिद्ध हो जाते हैं तो आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। पॉक्सो एक्ट धारा-14 तभी लगता है, जब कोई व्यक्ति नाबालिग बच्चों के साथ छेड़छाड़, दुष्कर्म के साथ बच्चों का सेक्सुअल हैरेसमेंट करता है। 

जेई पर लगीं धाराएं और उनमें सजा का प्रावधान

- पॉक्सो अधिनियम 2012 की धारा 14 में आजीवन कारावास। 

- धारा 377 में 10 वर्ष से आजीवन कारावास तक। 

-आइटी एक्ट 67-बी में अर्थदंड व पांच से सात साल सजा व अर्थदंड।   


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