कानपुर, [अंकुश शुक्ल]। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत की ओर से पहला शतक लगाने वाले आलराउंडर क्रिकेटर लाला अमरनाथ का लंबा समय कानपुर में बीता। एलनगंज में रहे और उनकी अर्धांगिनी स्वरूप नगर की ही थीं। उनकी पाठशाला में कानपुर का क्रिकेट खूब निखरा।

11 सितंबर 1911 को पंजाब में जन्मे लाला अमरनाथ ने वर्ष 1933 में इंग्लैंड के खिलाफ भारत की ओर से पहला शतक जमाया था। उनका खेल आज भी क्रिकेट प्रेमियों की जुबां और जेहन में है। काउंटी क्रिकेट क्लब के संस्थापकों में से एक अशोक गर्ग के मुताबिक लाला जी वर्ष 1958 से 1970 तक एलनगंज स्थित राधाकुटी में परिवार संग रहे। उन्होंने अपने कॅरियर का लंबा समय यही बिताया। उनका विवाह स्वरूप नगर निवासी कैलाश से पटियाला में हुआ था। उनके तीनों बेटे सुरेंद्रर, मोहिंदर और राजेंदर अमरनाथ के साथ दोनों पुत्री कमला और विमला भी कानपुर में ही रहीं। पांच अगस्त 2000 में 88 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।

बृजेंद्र स्वरूप पार्क में देते थे प्रशिक्षण

वर्ष 1975 से 1980 तक काउंटी क्लब के कप्तान रहे अरुण अवस्थी बताते हैं कि वर्ष 1973 में प्लेयर एसोसिएशन की स्थापना के बाद कोचिंग कैंप में लाला जी मुख्य कोच के रूप में खिलाडिय़ों को प्रशिक्षित करते थे और मैंने उनसे प्रशिक्षण लिया। बृजेंद्र स्वरूप पार्क में दो सत्र में वे प्रतिदिन अभ्यास कराते थे। उनका फोकस बल्लेबाजी और गेंदबाजी संग अनुशासन पर रहता था। उनसे प्रशिक्षण को शहर संग आस-पास के जिलों के युवा उमड़ते थे।

परफेक्ट था विजन

उप्र से बीसीसीआइ के ऑफिसियल स्कोरर पैनल में रहे शहर के सौरभ चतुर्वेदी ने बताया कि इंटरनेशनल मैचों में उनका विजन हमेशा सटीक रहता था। पिच को लेकर उनकी भविष्यवाणी ज्यादातर सही साबित होती थी। 

हैट, सिगार, टाई संग लाल रुमाल पहचान

लाला अमरनाथ को कानपुर में हैट, सिगार और लाल रूमाल के लिए पहचाना जाता था। मैदान के बाहर वह इनका उपयोग करते थे। बल्लेबाजी के दौरान जेब में लाल रुमाल जरूर रखते थे। उनके इस टोटके को पुत्र मोहिंदर अमरनाथ ने भी आजमाया।

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