कानपुर, जेएनएन। वायु प्रदूषण का बढ़ता स्तर सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है। नाक, कान और गले की समस्या बढ़ गई है। लोग साइनस का शिकार हो रहे हैं। एलएलआर अस्पताल (हैलट), उर्सला अस्पताल, नर्सिगहोम और निजी क्लीनिकों में काफी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। वायु प्रदूषण के सबसे ज्यादा शिकार सुबह-शाम सैर करने वाले और दोपहिया वाहन सवार हैं।

डॉ. संदीप कौशिक के मुताबिक प्रदूषित गैसों की वजह से गले में खराश, खांसी की शिकायत हो रही है। इससे लोगों की आवाज बदल रही है। शुरुआत में नाक बहना, छींक आना और सिरदर्द रहता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी और दूषित वायु के लंबे समय तक संपर्क में रहने से यह साइनस बन रहा है। इसमें नाक में संक्रमण हो जाता है, जिससे मास बढ़ने लगता है। नाक और कान आपस में यूस्टेशियन ट्यूब से जुड़े होते हैं। यह कान के बिल्कुल पीछे रहती है।

साइनस में कई बार ट्यूब ब्लॉक हो जाती है। इससे कान के पर्दे पर दबाव बढ़ जाता है। इससे कान के पर्दे में छेद भी हो सकता है। इसके अलावा हवा में मौजूद कण गले को संक्रमित करते हैं। गले में टांसिल का आकार बड़ा हो जाता है। यह समस्या छह से 10 साल के बच्चों में अधिक हो रही है। यही कारण है कि प्रतिदिन 300 की ओपीडी में एक तिहाई रोगी वायु प्रदूषण की चपेट में आकर नाक, कान और गले की समस्या लेकर आ रहे हैं।

क्या करें क्या न करें

- दोपहिया वाहन चलाते समय मुंह और नाक पर कपड़ा बांध कर चलें, मास्क लगाएं।

- एहतियातन सुबह और शाम को नमक और गुनगुने पानी से गरारा करें।

- एलर्जी की समस्या वाले लोग धूल, गर्द और दूषित गैसों के संपर्क में आने से बचें।

- डॉक्टर की सलाह पर ही दवाएं लें।

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