Kanpur में आंगन में अचानक फटी जमीन, पलक झपकते ही गड्ढे में समा गई युवती; भैया क्या लाओगे - पूछने वाली बहन की टूट गई सांस
कानपुर के महाराजपुर में भारी बारिश के बीच घर के आंगन में जमीन धंसने से 18 वर्षीय युवती यशी गहरे ...और पढ़ें

HighLights
कानपुर के महाराजपुर में घर के आंगन में जमीन धंसी
18 वर्षीय युवती यशी 25 फीट गहरे गड्ढे में समाई
एनडीआरएफ ने आठ घंटे बाद युवती का शव बरामद किया
संवाद सहयोगी, महाराजपुर(कानपुर)। यूपी के कानपुर के महाराजपुर में शुक्रवार सुबह एक खौफनाक हादसे ने हर किसी को दहला दिया। घर के आंगन में खड़ी 18 वर्षीय युवती परिवार की आंखों के सामने जमीन में समाती चली गई। करीब आठ घंटे तक एनडीआरएफ, पुलिस और प्रशासन की टीम 20 से 25 फीट गहराई में उसे तलाशती रही। रक्षाबंधन की खुशियों की तैयारी कर रहे परिवार में इस हादसे के बाद मातम पसर गया।

पुरवामीर में घटना के बाद बहन की याद में गमगीन इकलौता भाई अमित।जागरण
महाराजपुर के पुरवामीर गांव में रक्षाबंधन के दिन हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। हादसे से महज कुछ देर पहले ही 18 वर्षीय यशी ने लखनऊ में नौकरी कर रहे अपने इकलौते भाई अमित उर्फ भास्कर से फोन पर बात की थी। उसने पूछा था- भैया, घर कब तक आओगे और मेरे लिए क्या उपहार लाओगे,भाई ने कहा था कि वह रास्ते में है और नौ बजे तक पहुंच जाएगा, उपहार क्या है यह राखी बंधवाने के बाद ही बताएगा।

राहत व बचाव कार्य के दौरान एनडीआरएफ जवान सतेंद्र यादव ने नीचे उतरकर फावड़े से मिट्टी निकाली।जागरण
किसे पता था कि यह भाई-बहन के बीच की अंतिम बातचीत साबित होगी। भाई के घर पहुंचने से पहले ही यशी आंगन में धंसी जमीन के 20 फीट गहरे गड्ढे में समा गई। जब अमित घर पहुंचा, तो वहां चीख-पुकार मची थी और बहन को निकालने के लिए रेस्क्यू आपरेशन चल रहा था। अमित पड़ोस की छत पर बेसुध होकर बैठ गया।
करीब आठ घंटे बाद जब दोपहर में मलबे से यशी का बेजान शव बाहर निकाला गया, तो वह अपनी सूनी कलाई देखकर फफक पड़ा और बिलखते हुए बोला- बहन, तुम मेरी कलाई पर राखी भी नहीं बांध सकीं और मैं तुम्हें बचा भी नहीं सका।
हादसे के समय पिता विनोद कुमार और मां रेखा घर से 200 मीटर दूर मवेशियों के बाड़े में सानी-चारा कर रहे थे, जबकि बड़ी बहन अनूपा रसोई में भोजन बना रही थी। घटना की जानकारी मिलते ही विवाहित बहनें रुचि और रूपा भी रोती-बिलखती गांव पहुंच गईं।

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने घटना का संज्ञान लेते हुए एसडीएम नर्वल से विस्तृत जानकारी ली। उनके प्रतिनिधि सुरेंद्र अवस्थी ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और हरसंभव सहायता का भरोसा दिया।
वहीं एसडीएम नर्वल सत्यपाल प्रजापति व नायब तहसीलदार अजय प्रकाश ने राजस्व टीम के साथ पहुंचकर पीड़ित परिवार को दैवीय आपदा कोष के तहत चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता और मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने की बात कही, ताकि पीड़ित परिवार को इस कठिन समय में उचित संबल प्राप्त हो सके।

सावधानी बरती जाती तो बच सकता था हादसा
ग्रामीणों का कहना था कि सबमर्सिबल पंप के लिए खोदे गए गड्ढ़े को मिट्टी से पाटकर ऊपर से ईंट व फिर पक्का मसाला डालकर बंद कर दिया गया था, लेकिन अगर पहले ही गिट्टी और पक्का मसाला डालकर उसको भरा जाता तो शायद ये हादसा न होता।

मिट्टी धंसने के चलते कई बार रोकना पड़ा था रेस्क्यू
महाराजपुर: पुरवामीर में रेस्क्यू आपरेशन की जानकारी देते हुए एनडीआरएफ के जवान सतेंद्र यादव ने बताया कि गीली मिट्टी धंसने से बचाव कार्य कई बार रोकना पड़ा। टीनशेड तोड़कर बैकहो लोडर आगे बढ़ाया गया, लेकिन पक्की दीवार व शौचालय का चैंबर होने से मशीन रुक गई।
पड़ोस के घर कराए खाली, खोदाई से दीवारें दरकीं
रेस्क्यू के दौरान बगल के कल्लू सविता व गोरे सविता के घरों को खाली करा परिवार के लोगों को रेस्क्यू चलने तक घर में न रहने के लिए कहा गया। खोदाई के दौरान कल्लू के घर की दीवार दरक गई। कुछ लोग बचाव कार्य देखने के लिए दीवार के नजदीक पहुंचे तो पुलिसकर्मियों ने भगाया।
