कानपुर, जागरण संवाददाता: गंगा और इसकी सहायक नदियों को दूषित करने वाले उद्योगों को नोटिस जारी किए गये हैं। इनमें सभी ऐसे उद्योगों को शामिल किया गया है जिनसे निकलने वाले दूषित पानी को सीधे गंगा में छोड़ा जाता है। नोटिस के साथ ही सभी टेनरी और उद्योगों में खराब पानी के निस्तारण के इंतजामों की जांच भी की जाए।

गंगा को प्रदूषण से मुक्त करने के लिये किये जा रहे प्रयासों के तहत यह आदेश राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा कृष्णकांत सिंह एवं अन्य बनाम राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन अधिकरण एवं अन्य के मामले में पारित किया गया है। इसमें पानी के उद्योग, सीमेंट, फर्टिलाइजर, केमिकल, डाइंग, टेक्सटाइल एंड ब्लीच, सुगर, पेस्टीसाइड, फूड एंड डेयरी, टेनरी, सीईटीपी, पेपर, स्लाटर हाउस, मीट प्रोसेसिंग आदि उद्योगों को शामिल किया गया है। कानपुर शहर में 468 उद्योगों को नोटिस दिया गया है।

इन शहरों के कारखाने भी जद में

मिर्जापुर, फर्रुखाबाद, फतेहपुर, रामपुर, इलाहाबाद, गाजियाबाद, मुरादनगर, ग्रेटर नोयडा, गोरखपुर, सिकंदराबाद, जेपीनगर, गजरौला, चंदौली, बुलंदशहर आदि शहरों के कारखाने भी शामिल हैं।

'नेशनल ग्रीन ट्रिब्यून के तहत उद्योगों और कारखानों को जो नोटिस देने का आदेश हुआ है उन्हें इकाइयों को जारी करवाया गया है।' -टीयूखान, क्षेत्रीय प्रबंधक, प्रदूषण नियंत्रण विभाग।