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कन्नौज: यूपी सिडको में टेंडर के नाम पर रिश्वत मांगने के आरोप में JE बर्खास्त, एक्सईएन सस्पेंड

Published: Sat, 17 Oct 2026 08:15 AM (IST)

यूपी सिडको में टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के आरोप में अधिशासी अभियंता संजय गंगवार को निलंबित कर दिया गया है, ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर

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HighLights

  1. यूपी सिडको में टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का आरोप।

  2. एक्सईएन संजय गंगवार निलंबित, जेई कमल बाबू बर्खास्त।

  3. रिश्वत मांगने और अनियमितता पर एफआईआर के आदेश।

जागरण संवाददाता, कन्नौज। औरैया की एक फर्म संचालक समेत कई ठेकेदारों ने यूपी सिडको के प्रबंध निदेशक को टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाते हुए शिकायती पत्र दिया था।

मामले को संज्ञान में लेते समाज कल्याण विभाग के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरुण के निर्देश पर टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वाले सिडको के अधिशासी अभियंता संजय गंगवार को निलंबित कर दिया गया है, जबकि संविदा पर तैनात जूनियर इंजीनियर कमल बाबू को बर्खास्त किया गया है। साथ ही पुलिस अधीक्षक को एफआइआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।

बताते हैं कि जनपद औरैया के कस्बा खानपुर प्रीमिसेस बिल्डिंग राजेंद्र बहादुर रोड एलजी गार्डेन दिबियापुर निवासी जितेंद्र कुमार की मैसर्स स्टार सिटी कंस्ट्रक्शन नाम से फर्म है। उन्होंने कुछ समय पहले कुछ अन्य ठेकेदारों के साथ मिलकर प्रबंध निदेशक यूपी सिडको (उत्तर प्रदेश प्रमुख निर्माण एवं इंफ्रास्ट्रक्चर विकास निगम) से करते हुए कार्रवाई की मांग की थी। इधर इस मामले की शिकायत विधायक व समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण तक पहुंच गई।

मंत्रालय से संबंधित विभाग में निर्माण कार्यों में गड़बड़ी की शिकायत पहुंच गई। इसमें आरोप था कि एकीकृत विकास योजना के अंतर्गत साढ़े तीन करोड़ रुपये के टेंडर में ठेकेदार को अनुचित लाभ दिया गया। प्रबंध निदेशक और मंत्री ने प्रकरण की प्रारंभिक जांच कराई गई। जिसमें अनियमितता की पुष्टि हुई।

चैट और वॉइस कॉल से मांगी रिश्वत

जांच के बाद मंत्री के निर्देश पर एक्सईएन संजय गंगवार को निलंबित कर दिया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं अपनाई। एक ही ठेकेदार को बार-बार अनुबंध आवंटित किया गया और स्वीकृत राशि की तुलना में टेंडर राशि में नाममात्र का अंतर रखकर नियमों की अनदेखी की गई।

वहीं संविदा पर तैनात जेई कमल बाबू को विभाग ने बर्खास्त कर दिया है। जेई पर आरोप है कि उन्होंने चैट और वॉइस कॉल के माध्यम से ठेकेदार से रिश्वत और धनराशि की मांग की। जांच के दौरान प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए। पुलिस अधीक्षक को मामले में प्राथमिकी दर्ज कर इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्यों की गहनता से फारेंसिक जांच कराने का आदेश दिया है। संपूर्ण प्रकरण में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस की नीति पर कटिबद्ध है और जनता के पैसे का दुरुपयोग किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस मामले में जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने कहा कि प्रकरण संज्ञान में नहीं है। यूपी सिडको का मुख्यालय कानपुर में है। यहां कार्यालय भी नहीं है। विभाग से सूचना भी नहीं मिली है।

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