जागरण संवाददाता, कन्नौज: कहते हैं कि डाक्टर भगवान का दूसरा रूप होते हैं। यह साबित कर दिखाया है, जिला अस्पताल में मेटरनिटी विग में बने सिक एंड न्यू बोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में 700 ग्राम के नवजात बच्चे की जिदगी बचाकर। यह किसी करिश्मे से कम नहीं है कि दो माह में ही नवजात का वजन 930 ग्राम से भी अधिक हो गया।

एसएनसीयू में प्रीमैच्योर डिलीवरी के दौरान कई बच्चे जन्म लेते हैं, लेकिन उनके बचने की आशंका कम ही रहती है। दो माह पहले जनपद औरैया के ग्राम नगला सुभाष बाहिदपुर निवासी अवधेश कुमार ने अपनी पत्नी रीना को भर्ती कराया। रीना को समय से पहले प्रसव हुआ था। उन्होंने बेटे को जन्म दिया था। जन्म के बाद नवजात का वजन महज 700 ग्राम था। पीडियाट्रीशियन डा. सुरेश यादव ने बच्चे को रेडिएंट वार्मर में रखवाकर उपचार किया। कम समय में जन्म लेने के कारण वह सेप्सिस का शिकार भी था। मगर डाक्टरों की टीम ने नियमित देखरेख करते हुए उसे वेंटीलेटर पर रखा। तीन दिन बाद उसकी हालत में सुधार हुआ। अब दो माह बाद उसका वजन 930 ग्राम हो गया है। डाक्टरों ने बताया कि जन्म के दौरान बच्चे का वजन डेढ़ किलोग्राम से कम नहीं होना चाहिए। एक किलोग्राम से कम वजन के बच्चों के बचने की गुंजाइश कम ही रहती है। पहली बार किसी 700 ग्राम के बच्चे को जीवनदान मिला है। इस संबंध में सीएमएस डा. शक्ति बसु ने बताया कि एसएनसीयू के स्टाफ की बदौलत कई बच्चों को जीवनदान मिल चुका है। इसमें सुविधाओं का और भी विकास किया जाएगा।

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