संवाद सहयोगी, तिर्वा : राजकीय मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की कमी से वेंटीलेटर कमरे में पैक रखे हैं। मरीजों को नहीं मिल पा रहे हैं। सांस के मरीजों को आइसीयू, वेंटीलेटर की जरूरत है, लेकिन मरीजों को नसीब नहीं हो पा रहा। इससे मरीजों की सांसें थम रही हैं।

राजकीय मेडिकल कॉलेज के आइसीयू में 10 सामान्य वेंटीलेटर व दो डिजिटल वेंटीलेटर हैं। इसके बाद वर्ष 2020 में कोरोना का संक्रमण बढ़ने से मेडिकल कॉलेज में आइसोलेशन वार्ड लेवल-टू का बनाया गया। इसमें गंभीर संक्रमित मरीजों का इलाज करने के लिए प्रधानमंत्री केयर फंड से 80 वेंटीलेटर भेजे गए थे। डॉक्टरों की कमी होने से वेंटीलेटर चालू नहीं हो सके। आइसीयू में ताला लगा है। दो माह पूर्व बंद पड़े 50 वेंटीलेटर शासन के निर्देश से लखनऊ के कैंसर अस्पताल कोविड-19 के आइसोलेशन वार्ड में भेजे जा चुके हैं। अब यहां पर 40 वेंटीलेटर हैं, लेकिन आइसोलेशन वार्ड में 10 वेंटीलेटर ही चल रहे और 30 वेंटीलेटर बंद कमरे में पैक रखे हैं। कोरोना संक्रमण की महामारी के इस दौर में मरीजों की तादात तेजी से बढ़ रही। मरीजों को ऑक्सीजन, आइसीयू व वेंटीलेटर की जरुरत है, लेकिन मरीजों को सुविधा नसीब नहीं हो रही। 150 बेड के आइसोलेशन वार्ड में करीब 108 मरीज भर्ती हैं। सीमित डॉक्टर होने से 10 वेंटीलेटर चल रहे और उन पर मरीज भर्ती है। निश्चेतना विभाग में डॉक्टर नहीं वेंटीलेटर व आइसीयू को चलाने के लिए निश्चेतना (बेहोशी) व मेडिसिन विभाग की स्पेशल टीम की जरूरत होती है। यहां पर निश्चेतना विभाग में कोई डॉक्टर नहीं और मेडिसिन के डॉक्टर भी कम है। जूनियर डॉक्टर के भरोसे अस्पताल चल रहा। इससे पैक रखे वेंटीलेटर को चालू नहीं किया जा रहा। डॉक्टरों की कमी पहले से थी और अब संक्रमण बढ़ने से डॉक्टर भी पॉजिटिव हो रहे। इससे समस्या और बढ़ गई। डॉक्टरों की कमी पूरी करने के लिए पूर्व में कई बार शासन स्तर पर पत्र भेजा गया लेकिन अभी तक तैनाती नहीं हो सकी। जैसे-तैसे जूनियर डॉक्टरों से काम कराया जा रहा है। डॉ. दिलीप सिंह, सीएमएस, राजकीय मेडिकल कॉलेज

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