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Lok Sabha Election Result: दांव पर लगी सैफई परिवार की प्रतिष्ठा..., अखिलेश-डिंपल समेत इन दिग्गजों पर टिकी सभी की नजरें

गंगा यमुना और शारदा नदी से सिंचित मध्य उत्तर प्रदेश में भाजपा की सियासी फसल 2014 की मोदी लहर के बाद से ही लहलहा रही है। क्षेत्र की 13 सीटों पर चुनाव लोकसभा का हो या फिर विधानसभा का सियासी ताप अमूमन पश्चिम से चली हवा बढ़ाती है। कन्नौज के सिवा इन सीटों पर 2014 से ही भाजपा का कब्जा है 2019 में वह भी उसने सपा से छीन ली।

By Jagran News Edited By: Abhishek Pandey Tue, 04 Jun 2024 07:36 AM (IST)
दांव पर लगी सैफई परिवार की प्रतिष्ठा..., अखिलेश-डिंपल समेत इन दिग्गजों पर टिकी सभी की नजरें

राजीव द्विवेदी, कानपुर। गंगा, यमुना और शारदा नदी से सिंचित मध्य उत्तर प्रदेश में भाजपा की सियासी फसल 2014 की मोदी लहर के बाद से ही लहलहा रही है। क्षेत्र की 13 सीटों पर चुनाव लोकसभा का हो या फिर विधानसभा का सियासी ताप अमूमन पश्चिम से चली हवा बढ़ाती है।

कन्नौज के सिवा इन सीटों पर 2014 से ही भाजपा का कब्जा है, 2019 में वह भी उसने सपा से छीन ली। भाजपा के लिए इस बार कन्नौज में जीत दोहराने तो बाकी सीटों पर हैट ट्रिक लगाने की चुनौती है।

सैफई परिवार के लिए प्रतिष्ठापूर्ण सीटों में से एक इटावा को भाजपा ने 2014 में सपा से छीन जरूर लिया, लेकिन अगले आम चुनाव में उसकी जीत का अंतर कम हो गया वह भी तब जबकि सपा मुखिया अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह भी अपनी पार्टी के सिंबल के साथ मैदान में थे।

शिवपाल इस बार भतीजे के साथ हैं, ऐसे में भाजपा के रामशंकर कठेरिया के सामने चुनौती है। फर्रुखाबाद सीट पर सपा द्वारा जातीय समीकरण साधने के बाद भी भाजपा के मुकेश राजपूत चुनौती देते दिख रहे हैं। लड़ाई कन्नौज में रोचक है, जहां भाजपा के सुब्रत पाठक के सामने सपा मुखिया अखिलेश यादव की चुनौती है।

2019 में पत्नी डिंपल की हार का बदला लेने के लिए मैदान में आए अखिलेश अपनी सरकार के कार्यों, स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से सहज संपर्क से भाजपा के लिए कड़ी चुनौती हैं। अकबरपुर में बसपा और कांग्रेस से सांसद रह चुके राजाराम पाल अब सपा से अकबरपुर सीट पर मैदान में हैं। उनकी सीधी लड़ाई दो बार के सांसद देवेंद्र सिंह भोले से है।

कानपुर संसदीय सीट पर भाजपा ने लगातार तीसरी बार प्रत्याशी बदला है, लेकिन उसकी पैठ को तोड़ पाना कांग्रेस के लिए इतना आसान भी नहीं दिखता। उन्नाव सीट पर भाजपा के साक्षी महाराज से दो बार कांग्रेस में रहते शिकस्त खा चुकीं अन्नू टंडन इस बार सपा से मैदान में हैं। साक्षी फिर महाराज बनेंगे, या अन्नू अंडन अपनी लोकप्रिय छवि से कुछ टक्कर दे पाएंगी, इस पर सबकी निगाहें हैं।

तिकुनिया हिंसा के बाद खीरी सीट पर भाजपा ने केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र टेनी को एक बार फिर मैदान में उतारा तो विपक्ष इस मुद्दे पर हमलावर रहा। करीब तीन साल पुरानी हिंसा का मसला उठाने के बाद भी सपा के उत्कर्ष वर्मा कितनी टक्कर दे पाएंगे, यह देखना रोचक होगा।

धौरहरा में भाजपा ने तीसरी बार रेखा वर्मा पर भरोसा किया। सपा के आनंद भदौरिया उनको कड़ी टक्कर दे रहे हैं। शाहजहांपुर सीट पर भाजपा सांसद अरुण सागर भले दोबारा मैदान में हों पर प्रतिष्ठा प्रदेश सरकार के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना की दांव पर है। अरुण का सीधा मुकाबला सपा के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के नेता राजपाल कश्यप की भांजी ज्योत्सना से है।

सीतापुर में भाजपा के राजेश वर्मा और कांग्रेस के राकेश राठौर के बीच मुकाबला है। सपा का साथ होने से वह मुख्य मुकाबले में हैं जरूर, लेकिन राजेश की हैट ट्रिक रोक पाना उनके लिए बड़ी चुनौती होगा।

हरदोई व मिश्रिख सुरक्षित लोकसभा सीट पर भाजपा का सीधा मुकाबला सपा से दिख रहा है। बहराइच सुरक्षित सीट पर भाजपा ने सांसद अक्षयवर लाल गोंड के बजाय उनके पुत्र डा. आनंद गोंड को मैदान में उतारा है। यहां भी भाजपा का सीधा मुकाबला सपा के रमेश गौतम से है। अब देखना यह है कि परिणाम आएंगे तो इस सीट पर मतदाताओं का साथ किसे मिलता है।

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