यूपी की काली नदी की होगी प्राकृतिक सफाई, छोड़ी जाएंगी कतला और नैनी प्रजाति की एक लाख मछलियां
काली नदी में जैव विविधता बढ़ाने और मछुआरों को लाभ पहुंचाने के लिए मत्स्य विभाग एक लाख रोहू, कतला, नैनी और कॉमन कार्प प्रजाति के मत्स्य बीज डालेगा।

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HighLights
काली नदी में एक लाख मत्स्य बीज छोड़े जाएंगे।
रोहू, कतला, नैनी और कॉमन कार्प प्रजाति के बीज होंगे।
जैव विविधता बढ़ेगी और मछुआरों को सीधा लाभ मिलेगा।
जागरण संवाददाता, कन्नौज। काली नदी में फिर से मछलियों की चहलकदमी बढ़ेगी। मत्स्य विभाग एक लाख मत्स्य बीज नदी में डालेगा। मत्स्य निरीक्षक हिमांशू यादव ने बताया कि रोहू, कतला, नैनी और कॉमन कार्प प्रजाति के एक लाख बीज डाले जाएंगे।
बीज वैज्ञानिक तरीके से तैयार किए गए हैं। डालने से पहले पानी की गुणवत्ता और तापमान की जांच होगी। बरसात के बाद नदी में पानी की मात्रा बीज के विकास के लिए अनुकूल है।
उन्होंने बताया कि इससे जैव विविधता बढ़ेगी और मछुआरों को सीधा लाभ मिलेगा। कुछ महीनों में मछलियां बड़ी होने पर नियमानुसार पकड़ी जा सकेंगी, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
नदी में मछलियों की संख्या बढ़ने से प्राकृतिक सफाई भी होगी। विभाग ने अपील की है कि छोटे आकार की मछलियों का शिकार न करें और मानकों का पालन करें। जल्द ही तारीख तय कर विभिन्न घाटों पर बीज डाला जाएगा।
