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झांसी में रेलवे श्वान प्रतियोगिता की रिहर्सल में दिखा खोजी दस्तों का दम, हैंडलर के इशारे पर दौड़े 70 प्रशिक्षित श्वान

Published: Thu, 22 Oct 2026 11:47 PM (IST)

झांसी में रेलवे सुरक्षा बल की अंतरक्षेत्रीय श्वान प्रतियोगिता की रिहर्सल हुई, जिसमें 17 जोन के 70 प्रशिक्षित श्वानों ने अपनी दक्षता का प्रदर्शन किया।

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HighLights

  1. झांसी में 70 प्रशिक्षित रेलवे श्वानों ने रिहर्सल में भाग लिया।

  2. ट्रैकर, स्निफर, नारकोटिक्स श्वानों ने अपनी विशेषज्ञता का प्रदर्शन किया।

  3. प्रतियोगिता 23 अक्टूबर को शुरू होकर 27 अक्टूबर तक चलेगी।

जागरण संवाददाता, झांसी। किसी को गंध का पीछा कर छिपा सामान तलाशना है तो किसी को विस्फोटक की पहचान करनी है। कोई मादक पदार्थों की गंध पकड़ने में माहिर है तो कोई अपने हैंडलर के इशारे पर संदिग्ध वस्तु तक पहुंचने की क्षमता रखता है।

रेलवे सुरक्षा बल की अंतरक्षेत्रीय श्वान प्रतियोगिता के पहले दिन गुरुवार को मैदान में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। देश के 17 जोन से आए 70 प्रशिक्षित श्वानों ने रिहर्सल के दौरान अपनी-अपनी विशेषज्ञता के मुताबिक अभ्यास किया। इस दौरान श्वानों के प्रशिक्षण, अनुशासन, गंध पहचानने की क्षमता और हैंडलर के साथ तालमेल को परखा गया।

प्रतियोगिता में अलग-अलग जोन के श्वान दस्तों को अपनी दक्षता दिखाने से पहले रिहर्सल की गई। गुरुवार सुबह 6 पहुंचे मैदान पर पहुंचते ही श्वान कदमताल करते नजर आये। प्रतियोगिता की औपचारिक शुरूआत रिहर्सल के साथ हुई। प्रतियोगिता में ट्रैकर, स्निफर और नारकोटिक्स श्वान पर सबकी निगाह हैं। रेलवे में यह श्वान सबसे ज्यादा पहचाने जाते हैं।

डीआरएम आज करेंगे उद्घाटन

प्रतियोगिता का 23 अक्टूबर को मण्डल रेल प्रबन्धक अनिरुद्ध कुमार उद्घाटन करेंगे। इस दौरान वरिष्ठ मण्डल सुरक्षा आयुक्त जितेन्द्र कुमार शर्मा समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहेंगे।

गंध के सहारे सुराग तक पहुंचता है ट्रैकर

ट्रैकर श्वान की सबसे बड़ी खासियत गंध के आधार पर किसी व्यक्ति या वस्तु से जुड़े सुराग का पीछा करना है। अपराध से जुड़े मामलों में किसी संदिग्ध के छोड़े गए गंध सम्बन्धी संकेतों के आधार पर आगे बढ़ने के लिए इन्हें प्रशिक्षित किया जाता है।

निर्धारित अभ्यास में किसी खास वस्तु की गंध पहचानकर उसे तलाशने की क्षमता भी परखी जाती है। इनका प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करता है कि वह गंध के संकेतों को कितनी सटीकता से पहचानते हैं और अपने हैंडलर के निर्देशों पर कितने बेहतर तरह से काम करते हैं।

स्निफर की सूंघने की क्षमता से पकड़े जाते हैं विस्फोटक

स्निफर श्वानों को विस्फोटक पदार्थों की गंध पहचानने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। रेलवे स्टेशन, ट्रेन, पार्सल, लगेज और संदिग्ध सामान की जाँच के दौरान इनकी मदद ली जाती है। विस्फोटक की गंध का संकेत मिलने पर श्वान अपने प्रशिक्षित व्यवहार के अनुसार हैंडलर को सतर्क करता है, और इसके बाद सुरक्षा कर्मी निर्धारित प्रक्रिया के तहत जाँच करते हैं। ऐसे श्वानों के लिए केवल गंध पहचानना ही नहीं, बल्कि भीड़भाड़ और शोरगुल वाले वातावरण में भी एकाग्रता बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है।

नारकोटिक्स श्वान पकड़ते हैं मादक पदार्थों की गंध

नारकोटिक्स श्रेणी के श्वानों को मादक पदार्थों की पहचान के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। यात्रियों के बैग, पार्सल, सामान और अन्य संदिग्ध स्थानों की जाँच में इनकी मदद ली जा सकती है। मादक पदार्थों की गंध पहचानकर यह सम्बन्धित स्थान या सामान की ओर संकेत करते हैं, जिसके बाद सुरक्षा कर्मी आगे की जाँच करते हैं। इनकी दक्षता का आकलन इस आधार पर किया जाता है कि वह निर्धारित परिस्थितियों में गंध को कितनी सटीकता से पहचानते हैं और कितनी विश्वसनीयता से अपने हैंडलर को संकेत देते हैं।

डाबरमैन से जर्मन शेफर्ड तक की अपनी खासियत

प्रतियोगिता में शामिल श्वानों में डाबरमैन, लैब्राडोर, बेल्जियन मैलिनोइस और जर्मन शेफर्ड जैसी नस्लें भी हैं। वरिष्ठ मण्डल सुरक्षा आयुक्त जितेन्द्र कुमार शर्मा ने बताया कि इन नस्लों की शारीरिक क्षमता, स्वभाव, प्रशिक्षण ग्रहण करने की योग्यता और काम के प्रति एकाग्रता इन्हें सुरक्षा सम्बन्धी कार्यों के लिए उपयोगी बनाती है। हालाँकि किसी श्वान की विशेषज्ञता केवल उसकी नस्ल से तय नहीं होती। इसके लिए उसका विशेष प्रशिक्षण, अभ्यास और हैंडलर के साथ तालमेल भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

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