'स्निफर डॉग का भौंकना हत्या का सबूत नहीं', बारामती कोर्ट ने दो साल पुराने मर्डर केस में आरोपी को किया बरी
बारामती कोर्ट ने एक हत्या के आरोपी को बरी कर दिया, यह कहते हुए कि स्निफर डॉग के सबूत हत्या साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
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तस्वीर का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।
HighLights
स्निफर डॉग सबूत हत्या साबित करने के लिए मान्य नहीं।
डीएनए रिपोर्ट में आरोपी-पीड़ित के खून का संबंध नहीं मिला।
बारामती कोर्ट ने दो साल पुराने हत्या के आरोपी को बरी किया।
डिजिटल डेस्क, पुणे। बारामती की एक अदालत ने कहा कि हत्या के आरोप को साबित करने के लिए स्निफर-डॉग (सूंघने वाले कुत्ते) से मिले सबूत का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अदालत ने 2024 में दौंड में एक लोन रिकवरी एजेंट (54) की हत्या के आरोपी 37 वर्षीय व्यक्ति को बरी कर दिया।
अदालत ने यह भी पाया कि डीएनए रिपोर्ट से आरोपी की पैंट पर मिले कथित खून के धब्बों और पीड़ित के खून के बीच कोई संबंध साबित नहीं हो सका। एडिशनल सेशन जज हितेंद्र उर्मिला अनिलकुमार वाणी ने इस व्यक्ति को आईपीसी की धारा 302 के तहत हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत अपराधों से बरी कर दिया।
अभियोजन पक्ष मौत को हत्या साबित नहीं कर पाया
अदालत ने माना कि प्रवीण मलेकर की मौत हत्या थी लेकिन अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि इसके लिए यही व्यक्ति जिम्मेदार था। अदालत ने गौर किया कि अभियोजन पक्ष के दोनों गवाहों में से कोई भी चश्मदीद गवाह नहीं था। अदालत ने कहा कि इसलिए अभियोजन पक्ष को हालात से जुड़े सबूतों (सर्कमस्टेंशियल एविडेंस) के जरिए कैजुअल वर्कर की संलिप्तता साबित करनी थी, जिसमें स्निफर-डॉग से मिला सबूत भी शामिल था।
1 मार्च 2024 को जब मलेकर घर लौट रहे थे तो एक व्यक्ति ने उन पर जानलेवा हमला किया। पुलिस की जांच के मुताबिक, एक स्निफर डॉग पुलिस को उस कैजुअल वर्कर तक ले गया जो मलेकर के घर के पास ही रहता था। यह जगह उस जगह से लगभग 2 किलोमीटर दूर थी जहां मलेकर घायल हालत में मिले थे।
'कुत्ते का भौंकना हत्या का सबूत नहीं'
ट्रायल कोर्ट ने कहा, "हालांकि किसी अपराध की जांच के लिए स्निफर डॉग की मदद ली जा सकती है लेकिन आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए ऐसे कुत्ते की क्षमता का इस्तेमाल सबूत के तौर पर नहीं किया जा सकता।"
कोर्ट ने माना कि सिर्फ इसलिए यह साबित नहीं किया जा सकता कि कैजुअल वर्कर ने चाकू से मलेकर को घायल किया था, क्योंकि कुत्ते ने उसे देखकर भौंका था। अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि कैजुअल वर्कर की पतलून पर खून के धब्बे मिले थे। दोनों डीएनए रिपोर्ट में कहा गया कि उन धब्बों से डीएनए प्रोफाइल नहीं मिल सकी।
इसके बाद कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि खून मलेकर का था और उसे ऐसा कोई परिस्थितिजन्य सबूत नहीं मिला जो कैजुअल वर्कर को अपराध से जोड़ता हो।
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