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नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड: दोषी सचिन अंदुरे को बॉम्बे HC से जमानत, उम्रकैद की सजा पर लगी रोक

Published: Tue, 18 Aug 2026 07:15 PM (IST)

मुंबई उच्च न्यायालय ने नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड में दोषी सचिन अंडुरे को जमानत दे दी है और उसकी आजीवन कारावास की सजा निलंबित कर दी है।

सचिन अंडुरे को दाभोलकर हत्याकांड में मुंबई उच्च न्यायालय से जमानत मिली

सचिन अंडुरे को दाभोलकर हत्याकांड में मुंबई उच्च न्यायालय से जमानत मिली

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राज्य ब्यूरो, मुंबई। महाराष्ट्र के सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड में दोषी ठहराए गए सचिन अंडुरे को मुंबई उच्चन्यायालय से बड़ी राहत मिली है। न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल और न्यायमूर्ति रणजीतसिंह भोसले की पीठ ने अंडुरे को जमानत दे दी और 2024 में सत्र न्यायालय द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को भी निलंबित कर दिया। हालांकि, अदालत के विस्तृत आदेश की प्रति अभी उपलब्ध नहीं हो सकी है।

अंडुरे पर सामाजिक कार्यकर्ता गोविंद पानसरे की हत्या के मामले में भी मुकदमा चल रहा है। इस मामले में भी उसे जमानत मिल चुकी है। ऐसे में अब दोनों मामलों में जमानत मिलने के बाद उसके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक नरेंद्र दाभोलकर की 20 अगस्त 2013 को पुणे में हत्या कर दी गई थी।

सचिन अंडुरे को दाभोलकर हत्याकांड में जमानत मिली

67 वर्षीय दाभोलकर सुबह की सैर पर निकले थे, तभी मोटरसाइकिल सवार दो हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी थी। दाभोलकर अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अभियान चलाते थे। शुरुआत में मामले की जांच पुणे पुलिस ने की थी।

बाद में दाभोलकर की बेटी मुक्ता दाभोलकर की ओर से हाई कोर्ट में दायर याचिका के बाद 2014 में जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) को सौंप दी गई। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि सचिन अंडुरे गोली चलाने वाले हमलावरों में शामिल था।

पुणे की सत्र अदालत ने सुनाई थी सजा

10 मई 2024 को पुणे की सत्र अदालत ने नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के मामले में सचिन अंडुरे और शरद कालस्कर को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

हालांकि, दोनों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और शस्त्र अधिनियम के तहत लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया गया था।

सबूतों की कमी से मिली जमानत

अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर वीरेंद्र सिंह तावड़े, संजीव पुनालेकर और विक्रम भावे को भी बरी कर दिया था। सजा के खिलाफ अंडुरे ने हाई कोर्ट में अपील दाखिल की थी।

इसी के साथ उसने अंतरिम आवेदन देकर जमानत और आजीवन कारावास की सजा निलंबित करने की मांग की थी। उच्चन्यायालय ने मंगलवार को उसका आवेदन मंजूर कर लिया। नरेंद्र दाभोलकर की बेटी मुक्ता दाभोलकर ने भी सत्र अदालत के फैसले को उच्चन्यायालय में चुनौती दी है।

उन्होंने आरोप लगाया है कि हत्या एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी और इसमें दक्षिणपंथी चरमपंथी तत्व शामिल थे। उन्होंने अंडुरे और कालस्कर पर यूएपीए के आरोप नहीं लगाए जाने तथा अन्य आरोपितों को बरी किए जाने को भी चुनौती दी है।

दाभोलकर की हत्या के बाद देश में सामाजिक कार्यकर्ताओं की हत्या की घटनाओं की एक श्रृंखला सामने आई थी। फरवरी 2015 में कोल्हापुर में गोविंद पानसरे, अगस्त 2015 में धारवाड़ में कन्नड़ विद्वान एमएम कलबुर्गी और सितंबर 2017 में बेंगलुरु में पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या कर दी गई थी।