झांसी (जेएनएन)। यूपी एटीएस ने आइबी के इनपुट पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के एक एजेंट को झांसी से गिरफ्तार किया है। इस एजेंट का नाम एजाज शाह खान उफर् बबलू है जो कि दिल्ली के कमला मार्केट का रहने वाला है। एजाज आइएसआइ एजेंटों को पैसे पहुंचाता था। एटीएस और अन्य एजेंसियां फिलहाल इससे पूछताछ कर रही हैं। इस गिरफ्तारी से कई अन्य आइएसआइ एजेंटों के बारे में जानकारी मिलने की संभावना है।

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इसके पहले आइएसआइ एजेंट जमालुद्दीन को लखनऊ से यूपी एटीएस ने 23 अगस्त की शाम गिरफ्तार किया। वह गाजीपुर जिले का रहने वाला है। उस पर आरोप है कि वह आइएसआइ के लिए काम करने वालों को पैसे उपलब्ध करवाता था। उसे यूएई के रास्ते आइएसआइ यह पैसे देती थी। यूपी एटीएस को इनपुट मिला था कि पाकिस्तान से हवाला के जरिए यूपी के एक शख्स के पास पैसे पहुंच रहे हैं। वो पैसा यूपी से राजस्थान में गोवर्धन के खाते में जमा कराया जाता था। उसके खाते में हर महीने 30 हजार रुपए जमा किए जाते थे।यह पैसे उसे जमालुद्दीन भेजता था इसलिए जमालुद्दीन को 6 महीने से ट्रेस किया जा रहा था।

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पाकिस्तान में आइएसआइ अफसर से मामा ने मिलवाया

एजाज शाह खान उर्फ बबलू पुरानी दिल्ली के कमला मार्केट थाना क्षेत्र के तीसरी मंजिल गली मीर मदारी रोड का रहने वाला है। करीब 40 वर्षीय एजाज की शिक्षा सेंट एंथनी वायज सेकेंड्री स्कूल पहाडग़ंज दिल्ली में हुई। दसवीं फेल होने के बाद पढ़ाई छोड़कर बिल्डिंग बनवाने का काम करने लगा। इसके मामा का घर व कई रिश्तेदारी पाकिस्तान में है। पांच छह वर्ष पहले इसके मामा मोहम्मद अकलीम ने आइएसआइ के लिए काम करने को कहा। वर्ष 2012 में यह पाकिस्तान गया तो इसको अकलीम ने एक आइएसआइ अफसर से मिलवाया। तभी से वह आइएसआइ के लिए काम करने लगा। पाकिस्तान के कराची में म्यामार अपार्टमेंट में रहने वाले आइएसआइ एजेंट अकलीम की मार्च 2014 में मौत हो गयी।

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इन्द्रपाल ने पाकिस्तान भेजे थे दस्तावेज

24 फरवरी 2014 को झांसी में इन्द्रपाल कुशवाहा को एटीएस ने गिरफ्तार किया था। बांदा के तिंदवारी थाना क्षेत्र के किछवाही गांव निवासी कुशवाहा आइएसआइ के लिए काम कर रहा था और बदले में उसे पैसे मिलते थे। इस फौजी के पास से सेना के गोपनीय और प्रतिबंधित चार अभिलेख, गोपनीय दस्तावेजों के ब्यौरे की सीडी और टेलीफोन डायरी समेत कई अहम दस्तावेज बरामद हुए थे। कुशवाहा ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ को भारतीय सेना का युद्ध प्लान भी बेचा। अभियुक्त की निशानदेही पर उसके पास से बरामद सीडी में भारतीय सेना का वार प्लान, 11 जीआरआरसी का आरबेट प्लान, महत्वपूर्ण सैन्य अधिकारियों की टेलीफोन डायरेक्ट्री एवं सैन्य व्यवस्थापन से सम्बंधित महत्वपूर्ण सूचनाएं एवं भारतीय सेना के युद्धक टैंक अर्जुन के निर्माण एवं विकास सम्बंधी प्रोजेक्ट में कार्यरत अधिकारियों के सम्पूर्ण विवरण भी मिले। अभियुक्त इन्द्रपाल कुशवाहा अपनी झांसी की नियुक्ति के पूर्व जब सिलीगुड़ी में 100 माउंट ब्रिगेड कमांडर के निजी सहायक के रूप में कार्यरत था, तभी धन का लालच देकर उसे आइएसआइ ने अपना एजेंट बना लिया। वह 1984 में भारतीय सेना में लिपिक के पद पर भर्ती हुआ और प्रोन्नत होकर 2009 में सूबेदार बन गया। कुशवाहा को अब जमानत मिल गयी है।

Posted By: Ashish Mishra

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